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Shiksha Mandal: एजूकेशन माफिया के इस सच से कल उठेगा पर्दा, कलाकारों से जानिए गरीबों की शिक्षा का कौन बना विलेन

Wed, 14 Sep 2022 01:15 PM IST
वर्तिका तोलानी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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शिक्षा मंडल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

शिक्षा को लेकर तमाम सरकारी योजनाओं के बावजूद प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने का ठेका लेने वाला माफिया कमजोर नहीं पड़ रहा है। गरीबों की पहुंच से दिनोंदिन दूर होती जा रही शिक्षा पर इस माफिया पर मजबूत होती पकड़ के रहस्यों से पर्दा उठाने की एक और कोशिश करने जा रही है नई वेब सीरीज ‘शिक्षा मंडल’। 15 सितंबर से एमएक्स प्लेयर पर शुरू हो रही इस इस सीरीज में अहम किरदार निभा रहे पवन मल्होत्रा, गौहर खान और गुलशन देवैया मानते हैं कि इस सूरते हाल को बदलने के लिए न सिर्फ ठोस कदम उठाने की जरूरत है बल्कि इसका असर भी दिखना जरूरी है।

 

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शिक्षा मंडल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अनुभवी कलाकार पवन मल्होत्रा कहते हैं, 'यह सच है कि शिक्षा एक धंधा बन गया है। जिस तरह से इंसान की जरूरत रोटी कपड़ा और मकान की होती है। वैसे ही शिक्षा और मेडिकल पर सबका अधिकार होना चाहिए। लेकिन अगर हम सीरीज 'शिक्षा मंडल' की बात करें, तो इसमें हम शिक्षा की बात नही कर रहे है। बल्कि हम बात कर रहे है परीक्षा के समय जो धांधली होती है, उसके बारे में। आज किसी के नाम पर कोई और परीक्षा दे रहा है। इस सीरीज में हमने इस तरह के स्कैम को उजागर करने की कोशिश की है।'

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शिक्षा मंडल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

वेब सीरीज ‘शिक्षा मंडल’ में पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रही गौहर खान कहती है,  'जब इस तरह के स्कैम का पर्दाफाश होता है, तब सरकार पर भी उंगलियां उठती है। जरूरी नहीं कि इस स्कैम में बड़े तबके के लोग ही शामिल हो। कभी कभी पेपर लीक हो जाता है, तो इसमें बड़े तबके के लोग शामिल नहीं भी होते है। यह सब छोटे स्तर पर होता है। इसमें  पुलिस को भी काफी दिक्कतों का सामना करना, पूरा सिस्टम इससे काफी प्रभावित होता है।'

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शिक्षा मंडल - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

सीरीज में कोचिंग सेंटर संचालन की भूमिका निभा रहे गुलशन देवैया कहते है,  'मैं भी ऐसा ही सोचता हूं कि अगर आप का बच्चा अच्छे स्कूल में पढ़ रहा है तो उसे ट्यूशन की क्या जरूरत है। अगर आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे है तब तो कोचिंग करना समझ में आता है लेकिन अगर अच्छे स्कूल में पढ़ने के बाद ही ट्यूशन की जरूरत पड़ रही है तो मुझे लगता है कि कुछ तो गड़बड़ है। शिक्षा ईमानदारी के साथ होनी चाहिए। कई लोग किसी इंस्टीट्यूट में पढ़ाते भी है और बाहर कोचिंग सेंटर का समानांतर कारोबार भी चला रहे है।'

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शिक्षा मंडल - फोटो : सोशल मीडिया

शिक्षा माफिया शब्द से कलंकित हुई शिक्षा प्रणाली के बारे में अभिना पवन मल्होत्रा कहते है,  'शिक्षा माफिया में शामिल लोग अपना रोल कई तरह से निभा रहे है। यहां जो नहीं पढ़ा है उसको कुर्सी पर बैठाने की बात हो रही है। अगर शिक्षा के साथ ऐसा खेल खेला जाएगा तो नुकसान सबका होगा। आज आप नजरअंदाज कर सकते है कि इससे मुझे क्या फर्क पड़ता है, लेकिन जब आप फेक डॉक्टर के पास उसकी बड़ी बड़ी डिग्री देखकर पहुंच जाएंगे तब आप पर फर्क पड़ेगा।'

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शिक्षा मंडल - फोटो : सोशल मीडिया
गौहर खान कहती हैं, 'हम पांच भाई बहन हैं। हमारे माता पिता ने कभी भी इस बात को लेकर हम पर दबाव नहीं बनाया कि अगर मैं 75 प्रतिशत मार्क्स ला रही हूं, तो मेरी छोटी बहन भी उतना ही लाए। हर बच्चे की अपनी अलग काबिलियत होती है। उसे प्रोत्साहित करें ना कि उस पर दबाव बनाए।' गुलशन देवैया कहते हैं, 'मेरे ऊपर भी इस बात को लेकर बहुत दबाव था कि डॉक्टर, इंजीनियर बन जाओ या फिर किसी बैंक में नौकरी कर लो। नहीं तो कोई भी सरकारी नौकरी कर लो। इसके अलावा कोई कुछ सोचता ही नहीं था। लेकिन फिर प्राइवेट सेक्टर आने से मार्केट खुला और आप यह निर्णय ले सकते है कि आप अपनी काबिलियत के हिसाब से क्या कर सकते हैं।'
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