मुझसे यदि कोई पूछता भी है कि आप दोनों कब साथ में फिल्म करेंगे, तो यही जवाब देता हूं कि मैंने उसके पास अपना बायोडाटा भेज दिया है। अब देखना होगा कि वह कब तक अप्रूवल देती है। मुझे कभी मेरी बेटी के साथ स्क्रीन शेयर करने का मौका मिलेगा, तो यह मेरे लिए गर्व की बात होगी।
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मैं हमेशा से यह कहता हूं कि मेरी बेटी सोनाक्षी मेरा गर्व है। भगवान का दिया हुआ सबसे खूबसूरत तोहफा है वह। मेरी आंखों का तारा है सोनाक्षी। वह फिल्म इंडस्ट्री में आई, लेकिन अपनी शर्तों पर। उसने आज तक जो भी किया, वह अपने दम पर और अपनी मेहनत से किया। अपने परिवार के सम्मान को उसने कभी ताक पर नहीं रखा, जिसकी मुझे हमेशा खुशी होती है। मुझे याद है फिल्म इंडस्ट्री में आने से पहले उसने मुझसे यह वादा किया था कि पापा मैं कभी आपका सिर नीचा नहीं होने दूंगी और आपको कभी कोई शिकायत का मौका नहीं मिलेगा। वह चीज आज तक उसने निभाई है। वह बचपन से ही समझदार थी। कभी किसी चीज के लिए मुझे या अपनी मां को परेशान नहीं किया।
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हां, बस जब मैं शूटिंग पर निकलता था, तो खूब रोती थी कि मुझे पापा के साथ जाना है। बस तभी एक समय था, जब वह रो-रोकर घर सिर पर उठा लेती थी। मैं उसको अपने साथ शूटिंग पर ले जाया करता था, लेकिन उसे वहां इतना बोरिंग लगता था कि वह कुछ ही देर में सो जाती थी। उसने अभिनय में आने के बारे में कभी पूरी तरह से नहीं सोचा था। किसी अन्य चीज की कोई मांग उसने कभी नहीं की।
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जब सोनाक्षी कॉलेज में थी, तब मैंने उसे एक कार उपहार दी थी, ताकि वह कॉलेज उससे आ-जा सके, लेकिन वह शुरू से इतनी आत्मनिर्भर थी कि वह कार उसने कभी इस्तेमाल नहीं की। वह हमेशा आम लोगों की तरह बस, ऑटो या ट्रेन से आती-जाती थी। जब उसने अभिनय में उतरने का सोचा, तो मैंने उससे कोई सवाल नहीं किया। मैं भी उसे अभिनय करते देखना चाहता था। जब सोनाक्षी छोटी थी, तो मैंने सोचा था कि उसके साथ एक एड करूं, लेकिन बात बन नहीं पाई। एक पिता होने के नाते उसे स्क्रीन पर देखने की इच्छा कहीं न कहीं मन में थी। मुझे उस पर विश्वास भी था और देखिए, जब उसकी पहली फिल्म 'दबंग' आई, मुझे बहुत खुशी हुई। मैं खुद ताज्जुब कर रहा था कि मेरी बेटी में कितनी प्रतिभा है। मैं उसकी ज्यादा फिल्में तो नहीं देख पाता, लेकिन जो भी देखता हूं, तो मुझे सुकून मिलता है उसकी प्रतिभा देखकर।
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मैंने उसकी फिल्म 'राउडी राठौर' भी देखी, उसमें भी उसकी और अक्षय कुमार की एक्टिंग देखकर मन खुश हुआ। हां, उसकी एक फिल्म है, जो मुझे बहुत पसंद है, वह फिल्म है 'लुटेरा'। इस फिल्म में मुझे लगा कि उसकी अभिनय क्षमता पूरी तरह से निखर कर सामने आई। मैंने जब यह फिल्म देखी थी, तो मैं स्तब्ध था, क्योंकि मैंने नहीं सोचा था कि सोनाक्षी इतना गंभीर किरदार इतनी खूबसूरती से निभा सकती है। मेरा बच्चा इतना अच्छा काम कर रहा है, तो मुझे हमेशा खुशी होती है।
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सोना कई बार मुझसे कहती भी है कि आप कभी मुझे क्रिटीसाइज नहीं करते। उसकी नजर में उसकी मां मुझसे ज्यादा बड़ी क्रिटीक है। उसकी बात कुछ हद तक सही भी है, क्योंकि मैं उससे बहुत प्यार करता हूं, तो लगता है कि मेरी बेटी जो कर रही है वह सही है। और यह इसलिए क्योंकि मैंने उसे जितनी भी आजादी दी, उसका उसने कभी फायदा नहीं उठाया। मैंने हमेशा उसे शांत रहने की सलाह दी। हमेशा कहा कि बेटा, जो भी तुम्हारे रास्ते में आए, चाहे वह चुनौती हो या कोई उपलब्धि, उसे कभी हावी मत होने देना। उसने हमेशा मेरी बातों पर गौर किया और उनका सम्मान किया।
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वह शुरू से ऐसी ही थी और खुशी है आज जब इतनी बड़ी स्टार है, तो भी वैसी ही है। उसने कभी अपने स्टारडम में आकर किसी को आहत नहीं किया। यहां तक कि आज भी उसके घर आने के लिए डेडलाइन्स हैं, न सिर्फ उसके लिए बाकियों के लिए भी। चूंकि मेरा झुकाव उसकी तरफ ज्यादा है, तो उस पर थोड़ा ज्यादा नजर रखता हूं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि उसकी गतिविधियों पर नजर रखता हूं और उसे कहीं आने-जाने से रोकता हूं। मैं अपनी बेटी पर पूरा विश्वास करता हूं और मुझे मालूम है कि वह इसे बनाए रखेगी। काम के प्रति उसके समर्पण को भी सलाम करता हूं।
मुझसे यदि कोई पूछता भी है कि आप दोनों कब साथ में फिल्म करेंगे, तो यही जवाब देता हूं कि मैंने उसके पास अपना बायोडाटा भेज दिया है। अब देखो, वह कब तक अप्रूवल देती है। मुझे कभी मेरी बेटी के साथ स्क्रीन शेयर करने का मौका मिलेगा, तो यह मेरे लिए गर्व की बात होगी। हर बाप की तरह मैं भी अपनी बेटी की उपलब्धियों पर फख्र करता हूं और उसके चेहरे पर हमेशा खुशी रहे, बस यही चाहता हूं।