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#LockDownInterview: बच्चा जानता है पार्क में जाना मना है, फिर भी जिद इसलिए करता है: शरमन जोशी

Sat, 09 May 2020 12:29 PM IST
अपूर्वा राय अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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शरमन जोशी - फोटो : ट्विटर
कोरोना वायरस की वजह से पूरे भारत में लॉकडाउन लागू है। इसके चलते लोगों को परेशानियां तो हो ही रही हैं। जो लोग अपने घर हैं और आसपास का माहौल कुछ हद तक ठीक है, वे तो फिर भी ठीक हैं। लेकिन, बाहर फंसे लोगों के लिए तो ये मुश्किलों भरा वक्त है। उनके न खाने का ठीक से ठिकाना है और न ही रहने का। परिवहन की सुविधा नहीं है इसलिए अपने घर भी पैदल जाना पड़ रहा है। इनकी खबरें जब हिंदी सिनेमा के बेहतरीन अभिनेता शरमन जोशी अखबारों में पढ़ते हैं तो बहुत दुखी हो जाते हैं।
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शरमन जोशी पत्नी के साथ - फोटो : सोशल मीडिया
अमर उजाला से अपनी मन की बात कहते हुए शरमन ने कहा, 'हमारा तो परिवार, बीवी और बच्चे के साथ अच्छा वक्त बीत रहा है। कभी लड़ते हैं, तो कभी झगड़ते हैं और कभी खुशी खुशी रहते हैं। दिन ऐसे ही कट रहे हैं। (हंसते हुए) मैं तो यह आश्चर्य मान रहा हूं कि 40 दिन हो गए घर पर रहते रहते, फिर भी बीवी मुझे झेल रही है और मैं बीवी को झेल रहा हूं। हम दोनों ही खुश हैं। लेकिन अगर गंभीर रूप से बात करूं तो अखबार पढ़ते ही दिल बहुत दुखी हो जाता है। लोग अपने सिर पर सामान लेकर, अपने बच्चों को गोद में लेकर अपने घर जा रहे हैं। परेशानियां झेल रहे हैं। खाने की दिक्कत है। ऐसा बुरा वक्त चल रहा है। पूरा देश इस वक्त इस महामारी की चपेट में है। कोरोना का यह भी एक चेहरा है।'
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शरमन जोशी - फोटो : ट्विटर
शरमन के तीन बच्चे हैं। कोरोना वायरस की वजह से बच्चों को बाहर न जाने के लिए समझाना भी बहुत मुश्किल है। वह कहते हैं, 'अभी कल की ही बात है कि मेरा बच्चा कहता है कि डैडी मुझे नीचे जाना है। मैंने कहा कि बेटा नीचे जाने की अनुमति नहीं है। वह बोलता है कि मुझे बिल्डिंग में नीचे खेलने के लिए जाना है। मैं उसे फिर कह रहा हूं कि बेटा नीचे जाने की अनुमति नहीं है। नहीं जा सकते। वह फिर कह रहा है कि डैडी मैं जानता हूं कि नीचे जाने की अनुमति नहीं है। मैं यह भी जानता हूं कि आप मुझे भेजेंगे नहीं। लेकिन, फिर भी मैं आपको बता रहा हूं कि मुझे नीचे जाना है। मतलब ये कि वह सब जानता है लेकिन उसका मन है। आजकल के बच्चे बहुत समझदार हैं। मेरे तीन बच्चे हैं। वे आपस में खेलते रहते हैं, लड़ते झगड़ते हैं। डाइनिंग टेबल को उन लोगों ने टेबल टेनिस बना रखा है। कभी लूडो और कैरम खेलकर वक्त गुजारते हैं।'

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बारिश 2 - फोटो : सोशल मीडिया
शरमन जोशी की नई वेब सीरीज 'बारिश 2' है। सीरीज में अपने किरदार के बारे में बताते हुए शरमन ने कहा, 'पहले सीजन के बाद जब हमने दूसरे सीजन पर काम करना शुरू किया तो समझने में थोड़ा वक्त लगा कि इसकी निर्देशक नंदिता मेहरा इसकी कहानी को किस तरह से बनावट देना चाहती हैं। फिर धीरे-धीरे जैसे कहानी आगे बढ़ती गई तो हम अपने किरदारों ढलते चले गए। मेरा किरदार इसमें थोड़ा धोखेबाजी का शिकार हो गया है और वह अंदर से टूट चुका है। उसे अपने परिवार वालों से ही धोखा मिला है और उसे कुछ सूझ नहीं रहा है। वह उसी से लड़ने की कोशिश कर रहा है।'
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बारिश 2 - फोटो : सोशल मीडिया
सीरीज में शरमन के साथ टीवी की मशहूर अभिनेत्री आशा नेगी मुख्य भूमिका में नजर आईं। उनके साथ तालमेल के बारे में बताते हुए शरमन कहते हैं, 'आशा के साथ मेरा तालमेल बहुत अच्छा रहा। व्यक्तिगत तौर पर भी हम अच्छे दोस्त बन गए हैं। इसके अलावा मेरी नंदिता मेहरा से भी बहुत अच्छी दोस्ती हो गई है। यह बहुत जरूरी भी था। जब एक कलाकार की एक निर्देशक से अच्छी दोस्ती हो जाए तो उनके लिए एक दूसरे के विचारों को समझने में आसानी रहती है। इसके अलावा भी सीरीज में साहिल श्रॉफ, प्रिया बनर्जी, विक्रम सिंह चौहान हैं। इन सभी के साथ में काम करके बहुत मजा आया और हम सब में बहुत अच्छा तालमेल रहा।' शरमन ने अपने करियर की शुरुआत एक थिएटर कलाकार के रूप में की थी। फिल्मों में काम करने के बाद वेब सीरीज करने का ये उनका पहला अनुभव रहा। 
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शरमन जोशी - फोटो : सोशल मीडिया
इसके बारे में बताते हुए वह कहते हैं, 'वेब सीरीज में काम करने का मेरा अनुभव बहुत अच्छा रहा क्योंकि यहां अपनी प्रतिभा को दिखाने का पूरा मौका मिलता है। टाइम भी बहुत रहता है। क्योंकि यह एक लंबा फॉर्मेट है तो इसमें सभी कलाकारों के किरदारों को पूरी तरह दिखाया जा सकता है। जब हम एक ही किरदार को लंबे समय तक करते हैं तो हमें उस किरदार के अलग-अलग रंग जीने को मिलते हैं। वहीं फीचर फिल्मों में बहुत ही कम समय मिलता है। वहां संवाद कम होते हैं। लिमिटेड टाइम में सब कुछ दिखाना भी है। और थिएटर भी थोड़ा छोटा ही फॉर्मेट है। वहां पर भी काम करने की एक समयावधि रहती है।'
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sharman joshi - फोटो : self
शरमन की नजर में वेब सीरीज जैसे लंबे फॉर्मेट से एक नुकसान भी है। वह बताते हैं, 'लंबे समय तक एक ही किरदार को करते रहने से मानसिकता पर असर पड़ता है। क्योंकि, जब हम किसी किरदार को निभाते हैं तो वह अपना असर तो छोड़ता ही है। अगर हम फिल्म में काम कर रहे हैं तो थोड़े समय के लिए किरदार में आना होता है। वहीं अगर हम उसी काम को अगर लगातार कर रहे हैं तो वह कहीं ना कहीं हमारे जेहन में बना रहता है। मेरे साथ भी शुरुआत में ऐसा होता था। मैं अक्सर अपने किरदारों को काफी लंबे समय तक भुला नहीं पाता था। लेकिन धीरे-धीरे जब अनुभव होना शुरू हुआ तो फिर यह सब चीजें मेरे लिए सामान्य हो गईं। फिलहाल सब ठीक है।'
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