शमशेरा
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
रणबीर कहते हैं, ‘कोई आज मुझसे मेरी ख्वाहिश पूछे तो मैं तो यही कहूंगा कि काश मेरे पिता इस फिल्म को देखने के लिए जीवित होते। वह हमेशा मेरी फिल्मों को लेकर, मेरे किरदारों को लेकर चौकन्ना रहे। वह इनकी समालोचना भी पूरी ईमानदारी से करते थे। उनको मेरी फिल्म पसंद आए या ना आए, वह इसके बारे में कोई भावना छुपाते नहीं थे। इसीलिए मैं आज इस बात से दुखी हूं कि वह ये फिल्म देख नहीं पाएंगे। हालांकि, मुझे इस बात की खुशी भी है कि मुझे ऐसी एक फिल्म करने का मौका मिला और मैं उम्मीद करता हूं कि वह जहां भी होंगे, मुझे देख रहे होंगे और मुझ पर गर्व महसूस कर रहे होंगे।’