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ये हैं शाहरुख से सोनम कपूर तक को सुरक्षा देने वालीं महिला बॉडीगार्ड, अब परिवार चलाने को भी नहीं है पैसे

Thu, 17 Dec 2020 05:44 PM IST
Mishra Mishra बीबीसी हिंदी
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शाहरुख खान के साथ फहमीदा अंसारी और अन्य बॉडीगार्ड्स - फोटो : बीबीसी हिंदी
बॉलीवुड सितारे जब भी अपने घरों से बाहर निकलते हैं अपनी फिल्मों की शूटिंग करने के लिए या फिर फिल्मों के प्रमोशन, ऐड फिल्म्स, इवेंट्स, आवॉर्ड्स समारोह, शादी या फिर पार्टी करने के लिए, ये कभी कहीं अकेले नहीं दिखते हैं। उनके साथ अक्सर उनके मुस्तैद बॉडीगार्ड नजर आते रहे हैं। सितारों की फैन फॉलोइंग के चलते सुरक्षा की यह व्यवस्था करनी होती है क्योंकि अक्सर इनकी एक झलक देखने के लिए भीड़ बेकाबू हो जाती है। अक्सर देखा गया है कि इन सितारों के सार्वजनिक जगहों पर पहुंचते ही लोगों की भीड़ उन पर टूट पड़ती है और इसी भीड़ के बीच से कलाकारों को सुरक्षित निकालना और उन्हें सुरक्षा देने के काम इन बॉडीगार्ड का होता है। अक्सर पुरुष बॉडीगार्ड को ही इस काम के लिए लिया जाता था लेकिन पिछले कुछ सालों से महिलाओं को भी इस क्षेत्र में काम मिलने लगा था। धीरे-धीरे महिला बॉडीगार्ड्स की संख्या भी बढ़ रही थी लेकिन कोरोना और उसके बाद लंबे लॉकडाउन ने इन लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।
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महिला बॉडीगार्ड्स - फोटो : बीबीसी हिंदी
पहले के मुकाबले काम कम मिल रहा है
वैसे लॉकडाउन के बाद फिल्मों की शूटिंग शुरू हो गई है। इवेंट या सिटी टूर के जरिये फिल्मों का प्रचार तो नहीं हो रहा है लेकिन आउटडोर शूटिंग, ऐड फिल्म्स पर फिल्मी सितारों की सुरक्षा का जिम्मा उठाने वाले बॉडीगार्ड और बाउंसर को पहले के मुकाबले कम लेकिन काम मिलना शुरू हुआ है। लेकिन इस इंडस्ट्री से जुड़ी महिलाओं को अभी भी काम का इंतजार करना पड़ रहा है। 42 वर्षीय फहमीदा अंसारी बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी महिला बॉडीगार्ड हैं।

बीबीसी हिंदी से खास बातचीत में वो कहती हैं, "पुरुषों के लिए काम आ रहा है लेकिन हम महिला बॉडीगार्ड के लिए काम बिलकुल नहीं आ रहा है जिसके चलते हमारी जिन्दगी परेशानियों से गुजर रही है और आने वाले दिनों तक यही हाल रहा तो हमारे लिए जीना मुश्किल हो जाएगा।"
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बेटी के साथ फहमीदा अंसारी - फोटो : बीबीसी हिंदी
17 साल से सिंगल हैं फहमीदा
फहमीदा अंसारी कहती हैं कि वो 17 साल से सिंगल मदर हैं। उन्होंने बताया, "मेरे एक्स हसबैंड ने कभी पलटकर अपनी बेटी का हाल तक नहीं पूछा। तब मैंने ये फैसला लिया कि मैं कभी दूसरी शादी नहीं करूंगी और अपनी बेटी की देखभाल अकेले ही करूंगी। मेरी एक दोस्त ने मुझे सलाह दी कि तुम फीमेल बॉडीगार्ड का काम करना चाहती हो। मैंने उसे हां कहा और फिल्मों के सेट पर काम करने लगी और फिल्मस्टार को गार्ड करने लगी।"

फहमीदा जीरो, सुपर 30, पद्मावत, मर्दानी, कलंक जैसी कई फिल्मों के अलावा बर्थडे पार्टी, सोनम कपूर की शादी से लेकर एक्ट्रेस की ऐड फिल्म्स सब को 24 घंटे सुरक्षा देने की जिम्मेदारी निभा चुकी हैं।

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महिला बॉडीगार्ड्स - फोटो : बीबीसी हिंदी
'कई बार कलाकरों के लिए गालियां भी खानी पड़ती हैं'
पहले इस काम को सिर्फ मर्दों के लिए ही माना जाता था। फहमीदा दावा करती हैं कि इस काम के लिए महिलाओं को मौका सबसे पहले अभिनेता रोनित रॉय की कंपनी एसीई सिक्योरिटी एंड प्रोटेक्शन एजेंसी और रोनित रॉय के रिश्तेदार दीपक सिंह की कंपनी डोम सिक्योरिटी ने देना शुरू किया।

फहमीदा ने बताया, "उन्होंने हम पर विश्वास रखा और कई मौके दिए। अब इनके पास भी हमारे लिए काम नहीं है इसमें इनकी कोई गलती नहीं है क्योंकि जब फिल्म प्रोडक्शन हाउस ही हमें नहीं बुलाएगा तो ये हमें कैसे काम देंगे।"

लॉकडाउन के बाद काम के अवसरों के बारे में फहमीदा ने कहा, "केवल संजय लीला भंसाली जी ने हमें बुलाया और किसी और से अभी काम नहीं आया है। ऐसा लग रहा है कि कोरोना हम महिलाओं को ही होगा। ये तो गलत है। इस तरह तो हम भूखों मर जाएंगे। मेरे साथ और भी कई महिलाएं हैं जो रोज फोन करती हैं और पूछती हैं कि कुछ काम आया क्या? कुछ तो काम दिलवा दो हमें।"

 
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जरीन रफीक शेख - फोटो : बीबीसी हिंदी
फहमीदा की तरह जरीन रफीक शेख भी बॉलीवुड में पिछले चार सालों से बॉडीगार्ड का काम करती आ रही हैं। वो कहती हैं, "कई फिल्म जैसे सुपर-30, जीरो, छपाक, कलंक जैसी बड़ी फिल्मों की शूटिंग से लेकर उनके इवेंट के अलावा बड़ी-बड़ी पार्टियों का हिस्सा रह चुकी हूं।"

इस तरह के काम की चुनौतियों के बारे में जरीन ने बताया, "इस काम में जाने का तो समय होता है लेकिन आने का कोई समय नहीं होता। घंटों खड़े रहना होता है। जब स्टार्स अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए मॉल जाते हैं तो वहां भीड़ बहुत होती है और हमारा काम होता है सितारों को उस भीड़ से सुरक्षित निकालना। कई बार लोग हमें धक्का देते हैं, कई बार हम लोगों पर गुस्सा करते हैं तो लोग हमें पलटकर गालियां भी देते हैं, हमें सहना होता है। लोग अपना प्यार दिखाने के लिए कलाकरों पर कुछ न कुछ फेंक देते हैं ऐसे में ये हमारा काम होता है कि उन्हें किसी भी तरह की कोई चोट ना लगे। इसका ध्यान भी रखना होता है कि कोई उनके साथ जबरदस्ती तस्वीरें ना खिंचवाए।"
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सुनीता और फहमीना - फोटो : बीबीसी हिंदी
गुजारा चलाने का संकट
जरीन कोरोना संकट के दौर में परिवार चलाने की चुनौतियों के बारे में बताती हैं, "मेरे परिवार में मैं और मेरी दो बेटियां हैं। उनकी देखरेख मैं ही करती हूं। फिल्म 'छपाक' मेरा आखिरी काम था उसके बाद मार्च में ये लॉकडाउन हो गया था सात महीने घर पर थी बिना किसी रोजगार के अब जब शूटिंग शुरू हुई तो ये फिल्म प्रोडक्शन वाले अभी महिलाओं को बुला नहीं रहे हैं।"

"अगर आगे चलकर ऐसा ही हाल रहा तो हमारे लिए जीवन निर्वाह करना मुश्किल हो जाएगा क्योंकि फिल्म उद्योग में हमारे हितों पर ध्यान देने के लिए कोई संगठन भी नहीं है। जहां अलग-अलग संघों, परिषदों और फिल्मी संस्थानों से जुड़े दिहाड़ी मजदूरों को मदद मिल रही है वहीं हमारे पास किसी भी तरह की कोई सुविधा नहीं है।"

तीन साल से बॉडीगार्ड का काम कर रही सुनीता निकल्जे को बॉलीवुड इंडस्ट्री की लाइन बहुत पसंद है। वो कहती हैं, "मेरे परिवार में मेरे सास-ससुर, दो बच्चे और पति हैं। कुछ साल पहले पति के साथ दुर्घटना हुई जिसके चलते उनके सिर पर चोट लगने से उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ा और कुछ सालों से घर की जिम्मेदारी मेरे कंधे पर आ गई जिसके चलते मुझे नौकरी करनी पड़ी। मेरे घरवालों और मुझे मेरी ये नौकरी बहुत पसंद है क्योंकि यहाँ इज्जत बहुत है। परिवार वालों को खुशी होती है जब वो रिश्तेदारों को बताते हैं कि मैं कलाकारों की सुरक्षा देने का काम करती हूं, इस लाइन में पैसे भी अच्छे हैं, कलाकार भी हमें इज्जत और सम्मान देते हैं।''
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महिला बॉडीगार्ड्स - फोटो : बीबीसी हिंदी
'कई बार ताकत से ज्यादा दिमाग लगाना पड़ता है'
सुनीता कहती हैं कि सेट पर गर्म मिजाज का दिखना जरूरी है। वो कहती हैं, "हमें सेट पर थोड़ा कड़क रहकर लोगों से पेश आना होता है क्योंकि जब शूटिंग चल रही होती है तो कुछ जूनियर आर्टिस्ट मोबाइल से फोटो खींचते हैं इसलिए हमें सेट पर सबकी तलाशी लेनी होती है और लोगों का मोबाइल जब्त करना पड़ता है क्योंकि अगर फोटो वायरल हो गई तो इसका मतलब हमने ठीक से काम नहीं किया।"

"जब कभी आउटडोर शूटिंग चल रही होती है तो लोग हमसे पूछते हैं कि क्या यहां शूटिंग चल रही है? तो हमें उनसे झूठ भी बोलना पड़ता है ये कहकर की साउथ फिल्म है हीरो नया है। क्योंकि अगर हम उनको बता देंगे कि शाहरुख खान हैं यहां तो वो लोग पूरा दिन खड़े रहेंगे और हमें भी परेशान करेंगे इसलिए कई बार हमें ताकत से ज्यादा दिमाग भी लगाना पड़ता है।"

कोरोना तो भेदभाव नहीं करता?
सुनीता कहती हैं, "इस कोरोना और फिर लॉकडाउन ने सारी जमा पूंजी खर्च करवा दी है। मेरी प्रोडक्शन हाउस से एक ही विनती है कि कोरोना ने पुरुषों के मुकाबले हमारी ताकत कम नहीं की है। कोरोना किसी के साथ भेदभाव नहीं कर रहा है।"

वैसे ऐसा नहीं है कि प्रोडक्शन हाउस महिला बॉडीगार्ड के साथ जानबूझ कर भेदभाव कर रहे हैं बल्कि वास्तविकता में आयोजनों में कमी होने के चलते काम कम हो गया है, जिसके चलते इन महिलाओं के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
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