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इन 10 किरदारों की गिरहों संग मजबूत हुई शबाना की कलाकारी की डोर, हर किरदार लाजवाब, हर फिल्म बेजोड़

Fri, 18 Sep 2020 07:57 PM IST
अपूर्वा राय अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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शबाना आजमी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
भारतीय सिनेमा में कमाऊ फिल्मों के समानांतर चलने वाली कलात्मक फिल्मों वाले कलाकारों में अभिनेत्री शबाना आजमी का बहुत बड़ा नाम है। शबाना वह अभिनेत्री हैं जिन्होंने गंभीर मुद्दों पर बन रही फिल्मों में बेहतरीन काम करके खुद को स्थापित किया है। वह सिर्फ फिल्मों में ही नहीं, बल्कि असल जिंदगी में भी महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ने का काम करती हैं। 18 सितंबर को वह 70 साल की हो गईं। सिनेमा में उनके तमाम मील के पत्थर हैं, इनमें से 10 पड़ावों पर आइए डालते हैं, एक नजर।
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अंकुर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

किरदार : लक्ष्मी 

फिल्म : अंकुर (1974) 

वर्ष 1973 में एफटीआईआई से ग्रेजुएट होने के साथ ही शबाना ने ख्वाजा अहमद अब्बास की फिल्म 'फासला' और कांतिलाल राठौर की फिल्म 'परिणय' पर काम करना शुरू किया। लेकिन, उनकी पहली रिलीज फिल्म रही 'अंकुर'। श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में शबाना ने एक शादीशुदा नौकरानी लक्ष्मी का किरदार निभाया है। लक्ष्मी को गांव में अपने जमीदार पिता का व्यापार आगे बढ़ाने आए कॉलेज के एक छात्र सूर्या से प्रेम हो जाता है। लक्ष्मी गर्भवती हो जाती है, ऐसे समय में सूर्या उसका साथ छोड़ देता है। शबाना ने फिल्म में शानदार अभिनय किया है। यहां उन्हें अपनी पहली ही फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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स्वामी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

किरदार : सौदामिनी 

फिल्म : स्वामी (1977) 

अपनी पहली ही फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद शबाना के पास फिल्म निर्माता और निर्देशकों की लाइन लग गई। उन्हें बहुत सी फिल्मों के ऑफर मिलने लगे। शतरंज के खिलाड़ी, अमर अकबर एंथनी, चोर सिपाही, हीरा और पत्थर जैसी फिल्में करने के बाद वह नजर आईं बासु चटर्जी की फिल्म 'स्वामी' में। शबाना ने यहां एक गांव की लड़की सौदामिनी का किरदार निभाया है जो पढ़ने की बहुत शौकीन है। इसी बीच उसे कोलकाता में रहने वाले एक विद्यार्थी नरेंद्र से प्रेम हो जाता है। लेकिन, सौदामिनी के परिजन उसकी शादी पड़ोस के गांव के एक व्यापारी घनश्याम से कर देते हैं। फिर यहां से नया ड्रामा शुरू हो जाता है। इस फिल्म में शबाना के साथ गिरीश कर्नाड, उत्पल दत्त, विक्रम, सुधा शिवपुरी आदि कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आए। शबाना ने इस फिल्म के लिए अपना दूसरा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता। साथ ही उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार से भी नवाजा गया।

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जुनून - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

किरदार : फिरदौस

फिल्म : जुनून (1979)

शशि कपूर के निर्माण में बनी फिल्म का निर्देशन श्याम बेनेगल ने किया है। वर्ष 1857 में देश के क्रांतिकारियों और अंग्रेजों के बीच हुई लड़ाई की पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म में शबाना ने फिल्म के मुख्य किरदार जावेद खान की पत्नी फिरदौस का किरदार निभाया है। जावेद एक बेपरवाह आदमी है जो शादीशुदा होते हुए भी एक अंग्रेज औरत से इश्क कर बैठता है। इससे उसकी पत्नी फिरदौस को बहुत जलन होती है। फिर भी फिरदौस अपने धैर्य से काम लेती है और उस बारे में सोचती है जिससे उस समय पूरा समाज प्रभावित था। इस किरदार में शबाना आजमी की बहुत तारीफ हुई।

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अर्थ - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

किरदार : पूजा इंदर मल्होत्रा 

फिल्म : अर्थ (1982) 

शबाना आजमी ने तीसरा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार इस फिल्म के लिए जीता। यह ऐसा समय था जब हिंदी सिनेमा में दिल खोलकर कमर्शियल फिल्में बन रही थीं और ऐसे में शबाना आजमी ने महेश भट्ट के निर्देशन में बनाई 'अर्थ'। उनके साथ इस फिल्म में कुलभूषण खरबंदा, स्मिता पाटिल और राज किरण भी अहम भूमिकाओं में हैं। इस फिल्म को महेश भट्ट की शादी के बाद परवीन बॉबी के साथ शुरू हुई प्रेम कहानी पर आधारित माना जाता है। पूजा इंदर मल्होत्रा के किरदार में शबाना ने इस फिल्म में शानदार अभिनय किया है। इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार तो मिला ही, साथ ही सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार से भी नवाजा गया।

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मंडी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

किरदार : रुक्मिणी बाई

फिल्म : मंडी (1983)

श्याम बेनेगल के ही निर्देशन में बनी इस फिल्म में शबाना ने एक कोठे का संचालन करने वाली मैडम का किरदार निभाया है। फिल्म के केंद्र में कहानी के दो किरदार रुक्मिणी बाई और जीनत को रखा गया है। इन किरदारों को क्रमशः शबाना आजमी और स्मिता पाटिल ने अदा किया है। रुक्मिणी बाई जीनत को एक बेटी की तरह चाहती है। वह जीनत को उसके लिए काम करने वाली बाकी सभी लड़कियों से अलग समझती है। लेकिन दिक्कत तब शुरू होती है जब जीनत खुद को रुक्मिणी बाई के चंगुल से आजाद करना चाहती है। इस फिल्म का किरदार निभाने के लिए शबाना ने खुद कोठे पर जाकर इसकी बारीकियां सीखीं। जब यह फिल्म रिलीज हुई तो उनके अभिनय की तारीफ भी खूब हुई। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया।

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भावना - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

किरदार : भावना सक्सेना 

फिल्म : भावना (1984) 

शबाना ने इस फिल्म में भी एक चुनौतीपूर्ण किरदार निभाया है। वह इस फिल्म में एक अनाथ लड़की भावना सक्सेना की भूमिका निभाती हैं जो एक बड़े शहर में बिल्कुल अकेली है। उसके अकेलेपन को दूर करने के लिए अचानक से उसे एक अजय कपूर नाम का आदमी मिलता है जो बगीचे में बैठा हुआ खुद भावना की तस्वीर बना रहा है। इस चीज से प्रभावित होकर भावना और अजय दोस्त बन जाते हैं। दोनों एक दूसरे से प्रेम करते हैं और शादी भी कर लेते हैं। हालांकि, अजय के पिताजी इस शादी के लिए तैयार नहीं होते। भावना सक्सेना के किरदार में शबाना बहुत असरदार नजर आईं। प्रवीण भट्ट के निर्देशन में बनी इस फिल्म के लिए शबाना को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया।

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खंडहर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

किरदार : जामिनी 

फिल्म : खंडहर (1984) 

मृणाल सेन के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी बहुत दर्दनाक है। यहां किसी की जान नहीं जाती लेकिन स्थितियां कुछ ऐसी हैं कि देखकर ही तरस आता है। एक खंडहर में मां और बेटी रहते हैं। अचानक से वहां शहर से तीन दोस्त आते हैं और उन मां बेटी की कहानियां समझते हैं। दरअसल, उस लड़की की मां एक लड़के का इंतजार कर रही हैं जो उसकी बेटी जामिनी से शादी करने वाला है। जबकि वह आदमी तो पहले से ही कोलकाता में शादी कर चुका है। इन तीन दोस्तों में से एक उनकी ऐसी स्थिति को समझता है और जामिनी से प्रेम करने लगता है। यह फिल्म हिंदी भाषा की एक बंगाली फिल्म है। जामिनी का किरदार शबाना आजमी ने निभाया है जिसके लिए उन्हें अपने करियर का तीसरा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।

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पार - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

किरदार : रामा 

फिल्म : पार (1984) 

इस फिल्म की कहानी भी बहुत मार्मिक है। दरअसल, शबाना को जाना ही जाता है कुछ ऐसी कहानियों के लिए। यहां शबाना के साथ नसीरुद्दीन शाह और ओमपुरी मुख्य भूमिकाओं में हैं। कहानी में एक जमीदार गांव के चहेते अध्यापक को मरवा देता है। इसके विरोध में गांव का ही एक मजदूर नौरंगिया उस जमीदार के भाई को मारता है और अपनी बीवी को लेकर फरार हो जाता है। तमाम दिक्कतों के बाद वह एक जगह पनाह लेते हैं लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास होता है कि उन्हें गांव जाकर अपने आप को बेगुनाह साबित करना चाहिए। तब वह पैसे ना होने की वजह से नदी में ही तैरना शुरू करते हैं। यहां शबाना नौरंगिया की पत्नी रामा के किरदार में हैं। रामा गर्भवती होती है। उसे लगता है कि उसने अपना बच्चा इस उथल-पुथल में खो दिया है। लेकिन, जब अंत में नदी में तैरते हुए लंबी यात्रा करने के बाद वह बाहर निकलते हैं, तब उसे एहसास होता है कि वह अब भी गर्भवती है। इस फिल्म में भी शबाना ने शानदार अभिनय किया है इसके लिए उन्हें अपने करियर का चौथा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।

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गॉड मदर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

किरदार : रंभी 

फिल्म : गॉड मदर (1999) 

विनय शुक्ला के निर्देशन में बनी इस फिल्म में शबाना ने एक और चुनौती का सामना किया। वह यहां एक ऐसी महिला के किरदार में नजर आईं जो एक जगह के बड़े हिस्से पर राज करती है। यह फिल्म 80 और 90 के दशक में गुजरात के पोरबंदर में माफिया चलाने वाली संतोबेन जडेजा की कहानी से प्रेरित है। संतोबेन बाद में माफिया गिरी छोड़ कर राजनीति का हिस्सा बन गईं। एक तरह से यह संतोबेन की आधिकारिक रूप से बायोपिक ही हुई। शबाना आजमी ने गॉड मदर के रूप में रंभी का किरदार बहुत ही शानदार तरीके से निभाया है। इसके लिए शबाना को अपने करियर का पांचवां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।

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नीरजा - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

किरदार : रमा भनोट 

फिल्म : नीरजा (2016)

बहुत लंबे समय से अलग-अलग किरदारों को निभाने के बाद शबाना आजमी को यहां एक जिम्मेदार मां का किरदार निभाने का मौका मिला। राम माधवानी के निर्देशन में बनी इस बायोग्राफिकल थ्रिलर फिल्म में शबाना ने रमा भनोट का किरदार निभाया है। यह कहानी रमा की बेटी नीरजा भनोट की है जो अपनी जान पर खेलकर हाईजैक हुए जहाज के सभी यात्रियों को सुरक्षित बचाती है। शबाना के लिए इस फिल्म में अंतिम दृश्य बहुत भावुक रहा। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया भी है कि उस दृश्य को इतने अच्छे से लिखा गया था जहां उन्हें अपनी सारी भावनाएं दिखाने का मौका मिला। इस फिल्म के लिए भी शबाना को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया।

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