sanjay khan
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मैंने सत्येन बोस से कहा- दादा पिक्चर हिट हुई है और आज तक मेरे दरवाजे पर किसी ने दस्तक नही दीं। मैं बहुत टूटा हुआ हूं। क्या होगा मेरा भविष्य? मैंने मजाक में कहा कि दादा लगता है, खुदकशी कर लूं। वह बोले- तू देख दो-तीन हफ्ते में क्या आदमी बनने वाला है। जैसे ही उन्होंने कहा कि मेरे दरवाजे की घंटी बजी और सिलसिला शुरू हुआ। फिर छह महीने के अंदर मैंने हीरो के रूप में 100 फिल्में साइन कर लीं। जिनमें उस दौर की सारी बेहतरीन अदाकाराएं थीं। नूतन, नंदा, साधना, हेमा मालिनी से लेकर रेखा समेत कई नई लड़कियां थीं। एक दिन में मैंने तब पांच फिल्में साइन कीं। कभी तीन-तीन और कभी दो-दो फिल्में साइन की।