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Sneha Ullal: जिसे सलमान ने बहन के स्कूल से निकालकर बनाया हीरोइन, वो अब बनी बिश्नोई समाज की इस फिल्म की नायिका

Sat, 14 Dec 2024 02:51 PM IST
तनु चतुर्वेदी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

फिल्म ‘लकी नो टाइम फॉर लव’ की हीरोइन 20 साल पहले पर्दे पर नजर आईं थीं। उन्हें सलमान ने अपनी बहन के स्कूल से निकालकर अपने ख्यालों की मल्लिका बना दिया। अब वे बिश्नोई समाज पर बन रही फिल्म से वापसी करने जा रही हैं।
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स्नेहा उल्लाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

स्नेहा उल्लाल याद हैं आपको? वही अब से कोई 20 साल पहले आई फिल्म ‘लकी नो टाइम फॉर लव’ की हीरोइन। ये उन दिनों की बात है जब अभिनेता सलमान खान को पूर्व विश्व सुंदरी ऐश्वर्या राय ने अपने दिल से निकाल फेंका था और सलमान थे कि उनके जैसी हर सूरत पर मर मिटने को तैयार थे। सलमान को स्नेहा दिखीं अपनी बहन अर्पिता के स्कूल में और बस सिर्फ 17 साल की उम्र में सलमान ने उन्हें अपने ख्यालों की मल्लिका बना दिया। वही स्नेहा बतौर लीड हीरोइन फिल्म ‘साको 363’ से बड़े परदे पर धमाकेदार वापसी की तैयारी कर रही हैं।

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स्नेहा उल्लाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

पर्यावरण, वृक्षों और जीव जंतुओं की रक्षा के लिए राजस्थान के बिश्नोई समाज की बहादुर नायिका अमृता बिश्नोई के संघर्ष और सर्वोच्च बलिदान की सच्ची घटना पर आधारित फिल्म ‘साको 363’ का टीजर रिलीज कर दिया गया है। रामरतन बिश्नोई और विक्रम बिश्नोई के निर्देशित इस फिल्म में अमृता बिश्नोई का मुख्य किरदार खूबसूरत स्नेहा उलाल ने निभाया है। फिल्म निर्माताओ ने राजस्थान के नागौर जिले में एक बड़े समारोह में बिश्नोई समाज के लोगों को यह टीजर दिखाया। 

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स्नेहा उल्लाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
90 सेकंड के टीजर में शुरुआत में ही बताया गया है कि फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित है। पर्यावरण, वृक्षों और जीव जंतुओं की रक्षा को अपना धर्म समझने वाले बिश्नोई समाज ने पेड़ों को काटने से बचाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया था जिसका नेतृत्व बिश्नोई समाज की बहादुर नायिका अमृता बिश्नोई ने किया था। अमृता बिश्नोई के किरदार में स्नेहा उलाल सशक्त और ओजस्वी दिख रही हैं। टीजर के अंत में महिलाओं और बच्चों की रोंगटे खड़े कर देने वाली चीख पुकार काफी मार्मिक और असहनीय है जो आज से 300 वर्ष पहले बिश्नोई समाज के 363 लोगों को पेड़ों की रक्षा करने के कारण कुल्हाड़ी काटे जाने कि दर्दनाक कहानी को दर्शाता है।

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स्नेहा उल्लाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बिश्नोई समाज के लोग, जम्भेश्वर महाराज के 29 सिद्धांतों के अनुयायी हैं, जो प्रकृति और जीवों की सुरक्षा पर जोर देते हैं। उनका मानना है कि पेड़ों को बचाने के लिए अपने जीवन का बलिदान करना एक महान कार्य है, जैसा कि उनके गुरु ने कहा है, "अगर आपको एक पेड़ को बचाने के लिए अपना सिर काटना पड़ता है, तो यह एक सस्ता सौदा है।" साको अर्थात पर्यावरण की रक्षा के लिए अपनी मर्जी से सामूहिक बलिदान की यह सच्ची कहानी इस फिल्म के माध्यम से विश्व को पता चलेगी। यह फिल्म अगले साल 28 फरवरी को देश भर में रिलीज की जाएगी।
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स्नेहा उल्लाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इस अवसर पर रामरतन बिश्नोई और विक्रम विश्नोई ने कहा "पर्यावरण के प्रति बिश्नोई समाज के बलिदान की यह कहानी फिल्म के माध्यम से एक बड़े दर्शक वर्ग तक पहुचेगी यह अत्यंत महत्वपूर्ण घटना है जो कम ही लोगों को पता है। इस फिल्म के माध्यम से पूरी दुनिया को पता चलेगा कि किस तरह क़रीब 300 वर्ष पहले हमारे समाज कि एक वीरांगना ने वृक्षों की रक्षा के लिए अपना सिर कटा दिया था। इस फिल्म के माध्यम से आज के बच्चों और यंग जनरेशन को अपने पूर्वजों के पर्यावरण प्रेमी होने, उनके सर्वोच्च बलिदान के बारे में और अपने इतिहास के बारे में पता चलेगा।“

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