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Rukshaar Dhillon Interview: लंदन से आई कुड़ी पंजाब दी, वाया कन्नड़ और हिंदी अब पहुंची माटी से जुड़ी फिल्म में

Tue, 11 Jul 2023 05:33 PM IST
मोहम्मद फायक अंसारी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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रुखसार ढिल्लों - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
लंदन में जन्मी अभिनेत्री रुखसार ढिल्लों इन दिनों साउथ के साथ-साथ हिंदी और पंजाबी फिल्मों में भी व्यस्त हैं। रुखसार ढिल्लों का एक्टिंग के क्षेत्र में आने का इरादा बिल्कुल भी नहीं था। वह फैशन डिजाइनिंग का कोर्स करके अपनी फैमिली का बूटीक का बिजनेस संभालना चाहती थी। रुखसार अपने करियर की शुरुआत कन्नड़ सिनेमा से की। तेलुगू सिनेमा के सुपरस्टार नानी के साथ  'कृष्णार्जुन युद्धम' जैसी हिट फिल्म करने के बाद हिंदी सिनेमा में करियर बनाना रुखसार ढिल्लों के लिए इतना आसान नहीं था। अमर उजाला से बातचीत के दौरान रुखसार ढिल्लों  ने अपने संघर्ष के दिनों की बातें शेयर की।    
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रुखसार ढिल्लों - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

साउथ के हिंदी फिल्म और अब पंजाबी सिनेमा में डेब्यू, कैसा रहा अब तक का आप का सफर ?  

बहुत अच्छा सफर रहा है। मैं खुद पंजाबी हूं, लेकिन पंजाबी फिल्म पहले कभी की नहीं है। पंजाबी फिल्मों के तो पहले से भी बहुत ऑफर आ रहे थे। लेकिन मैं सोच रही थी कि ऐसी पंजाबी फिल्म से करियर की शुरुआत करूं, जिसमें अभिनेत्री के तौर पर कुछ अच्छा सा परफॉर्म करने का मौका मिले। अभी कंटेंट का जमाना आ गया है। भाषा अब कोई मायने नहीं रह गई है। पंजाबी फिल्म 'तुफांग' में दीप का किरदार  मेरे अब तक के करियर का सबसे मजबूत किरदार है। दीप जिस तरह से वह सोचती है, उसकी नैतिकता और उसके मूल्य बहुत अलग और अद्वितीय हैं। दीप के किरदार  में बहुत सारी अलग-अलग भावनाएं हैं, जिससे मुझे कुछ अलग करने का मौका मिला। इस फिल्म के निर्देशक धीरज रतन मेरी पहली हिंदी फिल्म 'भंगड़ा पा ले' की कहानी लिख चुके हैं, तभी से उनसे हमारी जान पहचान थी। 

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रुखसार ढिल्लों - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

हिंदी फिल्म 'भंगड़ा पा ले' से पहले आप साउथ की कई फिल्मों में काम कर चुकी थी, तो जाहिर सी बात हिंदी सिनेमा में डेब्यू करना आपके लिए आसान रहा होगा? 

बिलकुल भी नहीं। साउथ में मेरी शुरुआत कन्नड़ फिल्म 'रन एंटनी' से हुई। उसके बाद मैंने तेगुलू में  'आकातायी', 'कृष्णार्जुन युद्धम', 'एबीसीडी - अमेरिकन बॉर्न कन्फ्यूज्ड देसी' जैसी फिल्में की। नानी के साथ मेरी तेलुगू फिल्म 'कृष्णार्जुन युद्धम' हिट फिल्म रही है, फिर भी मुझे हिंदी फिल्म के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। पांच साल पहले जब मुंबई आई तो मुझे पता नहीं था कि फिल्मों के लिए निर्माता या निर्देशकों से कैसे मिला जाए। मैंने कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा के बारे में सुन रखा था। उनसे मिली और वहां कई बार ऑडिशन दे चुकी थी। अभी तो बहुत सारे कास्टिंग डायरेक्टर हो गए हैं, उस समय मुकेश छाबड़ा, जोगी मलंग और  विक्की सदाना को ही जानती थी। उस समय मेरा पूरा फोकस ऑडिशन पर ही था।

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रुखसार ढिल्लों - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिर 'भंगड़ा पा ले' आपको ऑडिशन के माध्यम से ही मिली होगी?  

जी, क्योंकि ऑडिशन के ही माध्यम से फिल्में मिल सकती थी यह बात मैं अच्छी तरह से समझ चुकी थी। किसी भी निर्माता और निर्देशक से मिलना इतना आसान भी नहीं था। मेरा कोई फिल्मी बैकग्राउंड तो  है नहीं कि कोई सपोर्ट कर दें, जो कुछ भी करना है कुछ के मेहनत और अपनी काबिलियत से हासिल करना है। मेरा सौभाग्य रहा है कि हिंदी सिनेमा में मेरी डेब्यू 'भंगड़ा पा ले' जैसी फिल्म से हुई। फिल्म का चलना न चलना अलग बात है।

 

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रुखसार ढिल्लों - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

साउथ इंडस्ट्री  में आपकी बोहनी कैसे हुई? 

उन दिनों मैं कॉलेज में थी और पॉकेट मनी के लिए कुछ टीवी कमर्शियल किए थे। कुछ कमर्शियल में मैंने कन्नड़ में बात की थी। उसे देखकर फिर बहुत सारी कन्नड़ फिल्मों के ऑफर आने लगे। लेकिन तब तक मैंने सोचा नहीं था कि मुझे एक्टिंग करनी है। कॉलेज खत्म करने के बाद जब  डॉ. राजकुमार के प्रोडक्शन हाउस से ऑफर आया, तो मुझे लगा कि इतने बड़े प्रोडक्शन हॉउस की फिल्म में काम करने का मौका मिल रहा है, सोचा कि एक बार करके देखते हैं। फिल्म 'रन एंटनी' में मैंने डॉ. राजकुमार के पोते विनय राजकुमार के साथ डेब्यू किया।

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रुखसार ढिल्लों - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

जैसा कि आपने कहा कि एक्टिंग के बारे में नहीं सोचा था, फिर आप किस प्रोफेशन में जाना चाहती थीं? 

मेरे दो ऑप्शन थे। हमेशा से मैंने क्रिएटिविटी  के बारे में ही सोचा है। एक तो मुझे शेफ बनाना था दूसरा फैशन डिजाइनर, लेकिन मैं निश्चित नहीं थी कि मुझे फैशन डिजाइनर ही बनना है। एक्टिंग का भी ऑप्शन था, लेकिन पक्का इरादा नहीं था क्योंकि फिल्म इंडस्ट्री में मेरी कोई जान पहचान  नहीं थी। मुंबई में रहीं नहीं, तो किस तरह से फिल्म इंडस्ट्री में कोशिश की जाए पता नहीं था। मेरी फैमिली का बुटीक का बिजनेस है। यह सोचकर फैशन डिजाइनिंग में बेंगलुरु यूनिवर्सिटी से फैशन डिजाइनिंग में डिग्री ली कि आगे फैमिली की बिजनेस में काम आएगा। वैसे भी आजकल कुछ भी सीखा हुआ कहीं न कहीं काम आता ही है।

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रुखसार ढिल्लों - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

आपका जन्म लंदन में हुआ है फिर लंदन से बेंगलुरु कब आई ? 

मैं लंदन में पैदा हुई हूं, लेकिन जन्म के छह महीने बाद मेरे माता पिता गोवा शिफ्ट हो गए और वहां अपना बुटीक  का बिजनेस शुरू किया। गोवा में मैंने आठवीं तक पढ़ाई की, उसके बाद नौवीं से पढाई करने के लिए बेंगलुरु शिफ्ट हो गई। बेंगलुरु में मुझे पढाई के दौरान  विज्ञापन फिल्में मिलने लगी, जिससे मुझे पहचान मिली। वहां कन्नड़ और तेलुगु फिल्में करते- करते अब मुंबई में शिफ्ट हो गई। अभी भी जब साउथ की कोई फिल्म करनी होती है तो मुंबई से ही जाती हूं और शूटिंग पूरी करके वापस मुंबई आ जाती हूं। 

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रुखसार ढिल्लों - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

तेलुगू सिनेमा के सुपरस्टार नानी के साथ फिल्म 'कृष्णार्जुन युद्धम' काम करने के अनुभव कैसे रहे हैं, उनसे ऐसी कौन सी खास बात सीखी आपने ? 

नानी तो बहुत बड़े स्टार हैं। पहली बार उनके साथ काम करने को लेकर बहुत नर्वस थी। लेकिन वह बहुत ज्यादा सपोर्टिव इंसान हैं । उन्होंने अपने दम पर इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई थी। इसलिए वह समझते हैं कि नए कलाकार को क्या -क्या परेशानियां आ सकती है। हमेशा ही वह एक गार्जियन की तरह मुझे गाइड करते रहते हैं।  अभी भी स्क्रिप्ट और एक्टिंग को लेकर कुछ भी सलाह लेना होता है तो उनको फोन करके लेती हूं और वह बहुत प्यार से गाइड करते हैं। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला जो अब काम आ रहा है। 

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