रुखसार ढिल्लों
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
हिंदी फिल्म 'भंगड़ा पा ले' से पहले आप साउथ की कई फिल्मों में काम कर चुकी थी, तो जाहिर सी बात हिंदी सिनेमा में डेब्यू करना आपके लिए आसान रहा होगा?
बिलकुल भी नहीं। साउथ में मेरी शुरुआत कन्नड़ फिल्म 'रन एंटनी' से हुई। उसके बाद मैंने तेगुलू में 'आकातायी', 'कृष्णार्जुन युद्धम', 'एबीसीडी - अमेरिकन बॉर्न कन्फ्यूज्ड देसी' जैसी फिल्में की। नानी के साथ मेरी तेलुगू फिल्म 'कृष्णार्जुन युद्धम' हिट फिल्म रही है, फिर भी मुझे हिंदी फिल्म के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। पांच साल पहले जब मुंबई आई तो मुझे पता नहीं था कि फिल्मों के लिए निर्माता या निर्देशकों से कैसे मिला जाए। मैंने कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा के बारे में सुन रखा था। उनसे मिली और वहां कई बार ऑडिशन दे चुकी थी। अभी तो बहुत सारे कास्टिंग डायरेक्टर हो गए हैं, उस समय मुकेश छाबड़ा, जोगी मलंग और विक्की सदाना को ही जानती थी। उस समय मेरा पूरा फोकस ऑडिशन पर ही था।