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Riteish Deshmukh Interview: हिंदी में फिर कॉमेडी धमाल मचाने आ रहे रितेश देशमुख, खास मुलाकात में किया खुलासा

Fri, 25 Aug 2023 10:54 AM IST
निधि पाल अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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रितेश देशमुख, वेद फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अभिनेता रितेश देशमुख की मराठी भाषा में बनी रोमांटिक ड्रामा फिल्म 'वेद' अब हिंदी में डब होकर टेलीविजन पर रिलीज होने जा रही है। इस फिल्म के जरिए रितेश देशमुख निर्देशक के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की है। फिल्म का निर्माण उनकी पत्नी  जेनेलिया डिसूजा देशमुख ने किया है। रितेश देशमुख ने इस फिल्म के टीवी प्रीमियर की पूर्व संध्या पर ‘अमर उजाला’ से ये खास बातचीत की।

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वेद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
'वेद' को हिंदी में डब करने की कोई खास वजह?
फिल्म हमने मराठी में बनाई थी। हिंदी में डब करके रिलीज करने का कोई विचार नहीं था। लेकिन जब फिल्म मराठी में रिलीज हुई और लोगों ने देखी। बहुत सारे लोगों का फोन आया कि अगर यह हिंदी में भी रिलीज हुई होती तो फिल्म को ज्यादा लोग देख पाते। इस फिल्म को महसूस कर पाते, क्योंकि फिल्म की जो थीम है, वह काफी यूनिवर्सल है। तब हमने तय किया किया कि मराठी में लोग फिल्म देख ही रहे हैं, तो फिल्म को हिंदी में भी दर्शक देखें। पहली बार ऐसा हो रहा है कि एक मराठी फिल्म हिंदी में डब होकर टीवी चैनल पर आ रही है।

इसे भी पढ़ें- Riteish Deshmukh: जेनेलिया की वजह से 'वेद' का निर्देशन कर पाए रितेश देशमुख, एक्टर ने पत्नी को दिया क्रेडिट
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रितेश देशमुख - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

निर्देशक बनने  का ख्याल कैसे आया था?

हम पांच मराठी फिल्मों का निर्माण कर चुके हैं। 'वेद' हमारी छठी फिल्म है। इस फिल्म के लिए कुछ निर्देशकों से संपर्क किया। जेनेलिया को मैने पांच साल पहले कहा था कि मैं फिल्म डायरेक्ट करना चाहूंगा लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पा रहा हूं। जेनेलिया का ही सुझाव था कि मैं ही फिल्म डायरेक्ट करूं। जब मैंने फिल्म की शूटिंग शुरू की तब लोगों को पता चला कि मैं फिल्म डायरेक्ट कर रहा हूं, उससे पहले मैंने यह बात किसी को नहीं बताई थी। शूटिंग के समय भी बड़ी खामोशी से फिल्म बनी।

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रितेश देशमुख - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

ओएमजी 2 से काफी पहले आपने फिल्म 'बालक पालक' में सेक्स एजूकेशन का मुद्दा उठाया था, क्या इसका हिंदी में रीमेक बनाने वाले हैं?

'बालक पालक' की कहानी बहुत ही अच्छी थी। लेकिन हम लोग रीमेक के बारे में नहीं सोच रहे। यह जरूर सोच रहे थे कि क्या वह कहानी आगे बढ़ सकती है। इस फिल्म की कहानी माता पिता और बच्चों के सेक्स एजुकेशन के बारे में थी। आज के दौर में अगर उस बारे में बात करनी है, तो किस तरह से बात कर सकते हैं। इस फिल्म में बहुत ही खूबसूरत संदेश देने की कोशिश की गई थी। जब यह फिल्म रिलीज हुई थी तो बहुत सारे स्कूल में इस फिल्म के शो हुए थे।

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रितेश देशमुख - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म 'लय भारी' को भी ट्रेंड सेटर फिल्म माना जाता है...
जेनेलिया से मैने एक बात सीखी कि काम महत्वपूर्ण होता है ना कि भाषा। अगर मराठी में 'लय भारी' जैसे जॉनर की फिल्म बन रही है तो  हिंदी में 'एक विलेन' जैसे जॉनर की फिल्में बन रही है तो क्यों न किया जाए। अगर 'धमाल' और 'हाउसफुल' जैसी कॉमेडी बन रही  तो क्यों किया जाए। जब मैं अपने करियर को देखता हूं, तो मुझे लगता है कि हर तरह की फिल्में करने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
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मालामाल वीकली, मस्ती - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

इंद्र कुमार के साथ 'मस्ती' और प्रियदर्शन के साथ 'मालामाल वीकली', दोनो का सिनेमा को लेकर अपना एक अलग नजरिया रहा है। इस बारे में आपके कैसे अनुभव रहे?

इंदु जी (इंद्र कुमार) के साथ पहले काम किया था। फिर प्रियदर्शन सर के साथ काम किया। प्रियदर्शन सर के साथ जब मैं  सेट पर होता था, तो मुझे पता ही नहीं चलता था कि मैं काम कर रहा हूं। उनका काम करने का एक अलग तरीका होता था। पूरी स्क्रिप्ट उनके दिमाग में होती थी। क्या फिल्म बनेगी, कुछ नहीं पता होता है। इंदु जी के साथ जब मेरी शुरुआत हुई तो उन्होंने मुझे कॉमेडी के बारे में बहुत कुछ सिखाया। बीस वर्षो में अगर किसी निर्देशक के साथ ज्यादा काम किया है, तो वह इंदु जी हैं। उनके साथ छह फिल्में कर चुका हूं और सातवीं फिल्म अभी शुरू होने वाली है।

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अलादीन फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, अमिताभ बच्चन के साथ..
मैंने उनके साथ तीन फिल्मों की हैं। उनके लिए एक अलग इज्जत है, लेकिन जब उनकी फिल्में देखते थे तब वह हमारे लिए अमिता बच्चन थे। जब पहली बार उनके साथ काम कर रहा था, तो रात भर सो नहीं पाया कि अमिताभ बच्चन के साथ काम करना है। अभिषेक बच्चन मेरे दोस्त हैं, इस वजह से उनको पहले से मैं जानता था। लेकिन जब एक एक्टर के तौर पर उनके सामने खड़ा हुआ तो, उनकी आंखों में देखता था। उनके हाथ की अंगुलियों को देखता था। सारी चीजें मेरे दिमाग में चल रही थी कि यह हकीकत है या फिर सपना है। उनके साथ स्टेज पर नाचा हूं। केबीसी में पिछले तीन साल में तीन बार जा चुका हूं। ऐसा लगता है कि जिंदगी पूरी हो गई।
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