Laila Majnu
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ऋषि कपूर की फिल्म 'लैला मजनू' 1979 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में ऋषि के कई डायलॉग फेमस हुए थे। उनमें से एक सबसे ज्यादा चर्चा में जो रहा वो है..
'संगमरमर से तराशा हुआ ये शोख बदन। इतना दिलकश है कि जी चाहता है..सुर्ख होठों में तरखती है वो रंगीन शराब, जिसको पी पीके बहक जाने को जी चाहता है। नरम सीने में धड़कते हैं वो नाजुक तूफान, जिनकी लहरों में उतर जाने को जी चाहता है। तुमसे क्या रिश्ता है कब से है ये मालूम नहीं, लेकिन इस हुस्न पर मर जाने को जी चाहता है। हमसे बेहतर है ये पाजेब जो इस पैर में है, इसी पाजेब में ढल जाने को जी चाहता है। रखले कल के ले ये दूसरी पाजेब-ए-दिल, कल इसी में फिर आने को जी चाहता है।'