रेखा ने कहा, 'ये रात है.. न तुम्हारी जुल्फें खुली हुई हैं.. है चांदनी या मेरी नजर से तुम्हारी राते धुली हुई हैं। ये चांद है या तुम्हारा कंगन.. सितारें हैं या तुम्हारा आंचल.. हवा का झोका है या तुम्हारे बदन की खुशबू.. ये पत्तियों की सरसराहट.. कि तुमने चुपके से कुछ कहा है। ये सोचता हूं मैं कबसे गुमसुम.. कि जबकि मुझको भी खबर है कि तुम नहीं हो कहीं नहीं हो.. 'मगर ये दिल है कि कह रहा है तुम यहीं हो..'