फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों संग रजा मुराद
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
अब फिल्में दिल से नहीं बनतीं
बदलते दौर की बात करें तो कुछ बातें आज अच्छी भी हैं कुछ अच्छी नहीं हैं। आज कास्टिंग एजेंसियां काम कर रही है। लेकिन हमारे जमाने में हीरो ही सब कुछ होता था। हीरो ही हीरोइन, विलेन और म्यूजिक डायरेक्टर के नाम का सुझाव देता था। किसी की हिम्मत नहीं होती थी कि हीरो के सुझाव को अनदेखा कर दे। आज हर आदमी अपना काम कर रहा है। पहले सेट पर कोई लड़की नहीं होती थी, आज हर डिपार्टमेंट में लडकियां काम कर रही हैं। पहले गुरु दत्त, विमल रॉय, महबूब खान, वी शांताराम, राज कपूर जैसे लोग हमारे इंडस्ट्री के पिलर रहे हैं। वे फिल्में दिल से बनाते थे। आज फिल्में दिल से कम दिमाग से ज्यादा बन रही हैं ।