बराबरी देने में हालत खराब हो जाती है
रवि किशन के मुताबिक, पुरुष मां-बहन की बात तो करता है लेकिन औरत को बराबरी देना उसे अब भी खटकता है। उन्होंने कहा, ‘हमारे समाज में पुरुष अक्सर मां-बहन को काफी इज्जत से बात करते हैं। लेकिन क्या बराबरी की बात आते ही उतने ही कंफर्टेबल रहते हैं? मैंने संसद में भी पिछले महीने यही बात बोली थी और लोगों ने सपोर्ट भी किया था।
दरअसल, लोग भूल जाते हैं कि आज पुरुष जो भी कर पा रहा है समाज में, जो भी नाम कमा रहा है, उसके पीछे ज्यादातर मां, बहन, पत्नी, गर्लफ्रेंड या बेटी जैसी कोई महिला शक्ति होती है। वो आपकी जिंदगी का आधा बोझ उठा लेती है। वो कहती है कि तुम जाओ, अपने सपने पूरे करो, मैं पीछे सब संभाल लूंगी… माता-पिता संभाल लूंगी, घर संभाल लूंगी, परेशानियां संभाल लूंगी… लेकिन आदमी जब कुछ हासिल कर लेता है, तब अक्सर ये सब भूल जाता है।’