मशहूर फिल्म निर्देशक रामगोपाल वर्मा ने हिंदी सिनेमा में अपनी खास स्टाइल के सिनेमा से बहुत नाम कमाया, फिर जैसा कि तमाम बड़े सितारों और फिल्ममेकर्स के साथ होता रहा है, उन्होंने अपने चारों तरफ ऐसे लोग जमा कर लिए जो उनकी हर बात पर हां में हां मिलाते रहे। रामू अपनी प्रोडक्शन कंपनी फैक्ट्री खोली और उन लोगों से दूरी बनानी शुरू की जो उनके सिनेमा पर सवाल उठाते थे। बस, यहीं से हिंदी सिनेमा में उनका करियर ढलान पर आ पहुंचा। जानिए राम गोपाल वर्मा की उन पांच सुपरफ्लॉप फिल्मों के बारे में जिनके चलते उन्हें हिंदी सिनेमा छोड़ फिर से साउथ का रुख करना पड़ा।
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jungle
जंगल (2000)
राम गोपाल वर्मा के हिंदी सिनेमा के आसमान पर चमकते सूरज को पहला ग्रहण लगा फिल्म जंगल से। इस फिल्म की अपनी समीक्षा में जबर्दस्त तारीफ करने पर फिल्म समीक्षक निखत काजमी को बहुत आलोचना झेलनी पड़ी। रामगोपाल वर्मा ने इस फिल्म से फरदीन खान को स्टार बनाने की कोशिश की लेकिन उनका खुद का निर्देशन करियर संकट में आ गया। फिल्म में फरदीन के अलावा उर्मिला मातोंडकर, सुशांत सिंह और सुनील शेट्टी अहम भूमिकाओं में दिखे। माना जाता है कि ये फिल्म रामू ने वीरप्पन के संसार को दिखाने के लिए बनाई थी।
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shiva
शिवा (2006)
शिवा नाम की फिल्म ने रामगोपाल वर्मा को विश्व सिनेमा में चर्चा दिलाई और इसी नाम की एक और फिल्म ने रामगोपाल वर्मा की हिंदी सिनेमा से विदाई तय कर दी। मोहित अहलावत नाम के एक्टर को लॉन्च करने के लिए बनी ये फिल्म मुंबई के अंडरवर्ल्ड पर आधारित थी। रिलीज होने के पहले ही दिन फिल्म फ्लॉप घोषित हो गई। फिल्म की हीरोइन निशा कोठारी से रामू की करीबी दोस्ती के चर्चे उन दिनों खूब थे और निशा को स्टार बनाने के लिए रामू उन दिनों अपना पैसा पानी की तरह बहा रहे थे। फिल्म ने रामू के नाम और पैसे दोनों को तगड़ा नुकसान पहुंचाया।
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राम गोपाल वर्मा की आग (2007)
गब्बर सिंह को रामगढ़ से निकालकर मुंबई लाने और रमेश सिप्पी की सुपरहिट फिल्म शोले का मॉडर्न वर्जन बनाने की रामू की ये कोशिश भी सुपरफ्लॉप रही। पहले इस फिल्म का नाम भी रामगोपाल वर्मा की शोले ही रखा गया लेकिन शोले के निर्माता जी पी सिप्पी के परिवार ने फिल्म शोले के नाम और सारे किरदारों के नामों को ट्रेडमार्क करा रखा है। फिल्म में अमिताभ बच्चन का रोल शहरी गब्बर सिंह का था जो लोगों को कतई पसंद नहीं आया। मोहनलाल ने फिल्म में ठाकुर का रोल किया तो अजय देवगन और प्रशांत राज के किरदार जय और वीरू से प्रेरित थे। फिल्म में अभिषेक बच्चन और उर्मिला मातोंडकर ने मिलकर एक आइटम सॉन्ग भी किया। हिंदी सिनेमा की ये पहली फिल्म रही, जिसे तमाम समीक्षकों ने जीरो रेटिंग दी थी।
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not a love story
नॉट अ लव स्टोरी (2011)
2008 में हुई नीरज ग्रोवर नामक एक टेलिवीजन एक्जक्यूटिव की दिल दहला देने वाली हत्या पर बनी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खासा कमाई नहीं कर पाई। फिल्म में माही गिल, दीपक डोबरियाल, नितीश शर्मा और अजय अहम भूमिकाओं में थे। फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर भट्ठा बैठ गया और साथ ही राम गोपाल वर्मा के करियर का भी।
करियर हाथ से निकलते देख रामगोपाल वर्मा एक बार फिर से क्राइम ड्रामा की तकफ लौटे। उनकी मदद करने के लिए अमिताभ बच्चन ने आग के बाद फिर एक बार अपना भी करियर दांव पर लगाया। साथ में संजय दत्त, राणा दग्गूबाती जैसे कलाकार भी आए पर फिल्म नहीं चली। राजनीति, अपराध और पुलिस के इस त्रिकोण से रामू अपनी हिट फिल्म सरकार जैसा करिश्मा करने की उम्मीद लगाए बैठे थे, पर फिल्म ने सारे किए कराए पर पानी फेर दिया।