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Raju Shrestha: ऋषिकेश मुखर्जी को हुआ अपनी गलती का एहसास और 'अभिमान' में अमिताभ को डांटने वाला दे दिया सीन

Tue, 15 Aug 2023 02:37 PM IST
ज्योति राघव अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सार


 
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राजू श्रेष्ठ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
राजू श्रेष्ठ ऐसे अभिनेता हैं, जिन्होंने चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर 70 और 80 के दौर में उस समय के हिंदी सिनेमा के सभी दिग्गज सितारों के साथ काम किया है। 15 अगस्त 1966 को मुंबई में जन्मे राजू श्रेष्ठ आज अपना 57 वां जन्मदिन मना रहे हैं। राजू का जन्मदिन बेहद खास मौके पर पड़ता है, क्योंकि वह अपने जन्मदिन के साथ-साथ इस दिन आजादी का महोत्सव भी बहुत धूमधाम से मनाते हैं। अपने जन्मदिन पर राजू श्रेष्ठ ने अमर उजाला से खास बातचीत की।
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राजू श्रेष्ठ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपका जन्म स्वतंत्रता दिवस यानी कि 15 अगस्त के दिन हुआ, यह दिन तो आपके लिए डबल सेलिब्रेशन जैसा होता होगा? 
इस दिन मेरे जन्मदिन की खुशी तो रहती ही है, लेकिन स्वतंत्रता दिवस की खुशी इतनी बड़ी होती है कि मेरी जन्मदिन की खुशी बहुत छोटी हो जाती है। मेरे जन्मदिन पर तो स्कूल में छुट्टी होती थी, तो 16 अगस्त को स्कूल में मिठाई बांटकर दोस्तो के साथ जन्मदिन मनाता था। 15 अगस्त की शाम को दोस्तों के साथ जन्मदिन का सेलिब्रेशन होता है। लेकिन दिन में कहीं न कहीं स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण के समय भी मौजूद रहता हूं।
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फिल्म 'परिचय' - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
शुरुआत आपकी चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर हुई, किस फिल्म से आपने शुरुआत की? जब आप पहले दिन शूटिंग पर गए होंगे तो फिल्मों और शूटिंग को लेकर आपके मन में क्या विचार आ रहे थे?
मैंने एक्टिंग की शुरुआत तकरीबन तीन-चार साल की उम्र में ही कर दी थी। उस वक्त तो वह मेरे लिए एक पिकनिक जैसा माहौल होता था। मेजर रोल में मेरी पहली फिल्म गुलजार साहब की 'परिचय' थी। यह जितेंद्र जी के होम प्रोडक्शन की फिल्म थी। इसमें मेरे साथ और भी बच्चे थे। 'परिचय' से पहले भी हमने जो एक दो फिल्में की हैं, उसमें छोटे-छोटे रोल थे। उसमें भी मेरा काम दूसरे बच्चों के साथ था। शूटिंग पर मेरे लिए हमेशा बच्चों के साथ खेलने और मस्ती करने जैसा ही माहौल था। मुझे पता ही नहीं चलता था कि शूटिंग हो रही है। 'परिचय' की शूटिंग के दौरान गुलजार साहब ने ऐसा माहौल बनाकर रखा था कि हमें पता ही नहीं चलता था कि शूटिंग कर रहे हैं। शूटिंग करते-करते मुझे समझ में आया कि यह मेरा प्रोफेशन है और लोग मुझे पहचान रहे हैं।

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फिल्म 'परिचय' - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
परिचय में आपने जया भादुड़ी (बच्चन) के छोटे भाई की भूमिका निभाई थी। भाई-बहन के बीच कैसी केमिस्ट्री रही?
इस फिल्म में तो मेरे साथ और भी बच्चे थे, लेकिन हरकतों से सबसे छोटे बच्चे जीतू जी (जितेंद्र) थे। उनका खुद का होम प्रोडक्शन था, तो हमारे साथ वह खेलते रहते थे। माहौल ऐसा सहज बनाकर रखते थे, ताकि हम लोग बोर न हो। गुलजार साहब के बारे में क्या कहें, उनको पता है कि एक्टर से काम कैसे निकालते हैं ? जया जी के साथ काम करने का अनुभव बहुत ही अच्छा रहा। उस जमाने की तकरीबन सभी हीरोइन के साथ काम किया है। इस लिस्ट में मौसमी चटर्जी, नीतू सिंह, जीनत अमान, परवीन बॉबी, योगिता बाली, हेमा मालिनी, टीना मुनीम आदि के नाम शामिल हैं। फिर बड़े होने के बाद मैंने माधुरी दीक्षित के साथ काम किया है।
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राजू श्रेष्ठ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपने शक्ति सामंत के निर्देशन में बनी फिल्म 'अमर प्रेम' में काम किया था, इस फिल्म से जुड़ी कुछ यादें शेयर करना चाहेंगे?
'अमर प्रेम', 'अन्नदाता',  'बावर्ची', जैसी मेरी कुछ ऐसी फिल्में हैं, जो 'परिचय' से एकाध साल पहले शूट की थीं। 'अमर प्रेम' का सेट नटराज स्टूडियो में लगा था। इस फिल्म में मैंने बिंदु जी के बेटे का किरदार निभाया था। उस वक्त ऐसा था कि जो मुझसे डायलॉग बोलने के लिए बोला जाता था बोल देता था। लेकिन गुलजार साहब और बासु चटर्जी के निर्देशन में काम करने का बड़ा अच्छा अनुभव रहा है। ये ऐसे निर्देशक रहे हैं कि बुरे एक्टर से भी अच्छा प्रदर्शन करा लेते हैं। मैं यह नहीं कहता कि शक्ति सामंत अच्छे निर्देशक नहीं थे, लेकिन उनका ऐसा ही था कि यहां बैठ जाओ और ऐसे डायलॉग बोलो। मैं आपको ऋषि दा ( ऋषिकेश मुखर्जी) की फिल्म 'बावर्ची' का एक किस्सा शेयर करता हूं। 
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गुलजार-राजू श्रेष्ठ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
वह कौन सा? 
ऋषि दा एक छोटा सा बच्चा ढूंढ रहे थे। गुलजार साहब ने मेरे नाम का सुझाव दिया। 'बावर्ची', 'परिचय' से पहले पूरी हो गई थी। मेरा 'बावर्ची' में कुछ खास रोल नहीं था। जब इस फिल्म का ट्रायल शो हुआ तो गुलजार साहब भी ट्रायल देखने आए थे। गुलजार साहब ने ट्रायल देखने के बाद ऋषि दा से कहा कि मैंने तुम्हे एक टैलेंटेड बच्चा दिया था, लेकिन बच्चे के टैलेंट का सही इस्तेमाल नहीं किया। ऋषि दा ने कहा कि इतना छोटा बच्चा है, क्या टैलेंट की बात रहे हो, क्या काम करवा लेता मैं इस बच्चे से। गुलजार साहब  ने कहा कि तुम 'परिचय' देखना फिर कहना कि बच्चे से कैसे काम लिया जाता है। 'परिचय' के ट्रायल पर जब ऋषि दा आए तो उनको लगा कि एक प्रतिभाशाली बच्चे का सही इस्तेमाल नहीं किया। उसके बाद ऋषि दा ने जब फिल्म 'अभिमान'  बनाई तो इसमें एक रोल खास रखा, जिसमें अमित जी (अमिताभ बच्चन) के साथ मेरा एक सीन था। जहां पर अमित जी सपना देखते हैं और मैं अमित जी को डांटता हूं।
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राजू श्रेष्ठ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, फिर तो आपने अमिताभ बच्चन के साथ कई फिल्में की, उनके बचपन का रोल भी निभाया ?
अमित जी के साथ मेरा सबसे जो बढ़िया रोल फिल्म 'फरार' में था। इस फिल्म का गाना 'मैं प्यासा तू सावन' बहुत मशहूर हुआ था। यह गाना मेरे और अमित जी के ऊपर फिल्माया गया था। इस फिल्म के अलावा मैंने उनके बचपन का रोल 'खुद्दार' और 'नास्तिक' में किया है। इसके अलावा मैं अमित जी के साथ फिल्में ज्यादा नहीं कर पाया, क्योंकि अमित जी की फिल्मों में किसी के करने के लिए कुछ होता नहीं है। उस वक्त मैं फिल्मों में मेजर रोल कर रहा था, जिसमें बच्चे का एक महत्वपूर्ण रोल हो। 'नास्तिक' में मैंने प्रमोद चक्रवर्ती के लिए काम किया। उनके साथ बहुत अच्छे और पुराने संबंध थे। उनके साथ बाद में मैंने 'बारूद', 'ड्रीम गर्ल' जैसी फिल्में की। 'फरार' के बाद अमित जी के साथ ऑन स्क्रीन ज्यादा अच्छे संबंध रहे नहीं है। ऑफ स्क्रीन तो आज भी बहुत अच्छे संबंध हैं। वैसे मेरा संपर्क ज्यादातर जया जी ( जया बच्चन)  के साथ रहता है और वह आज भी बरकरार है। 

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किताब - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
गुलजार साहब की एक फिल्म आई थी 'किताब', देखा जाए तो उस फिल्म में मुख्य भूमिकाएं आपकी ही थी?
इस फिल्म के लिए मुझे 1978 में फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला था। 'किताब' के कई सीन ऐसे हैं, जो मेरी ही जिंदगी के साथ जुड़े हुए हैं। मैंने गुलजार साहब के साथ 'परिचय' और 'खुशबू' जैसी फिल्मों में काम किया, तो उनके घर पर आना-जाना होता था। उनसे जो हमारी बातचीत होती थी, उसी से कहीं न कहीं 'किताब' का ख्याल उनके दिमाग में आया था। इस फिल्म का एक गाना 'धन्नो तेरी आंख' में था, जिसे हम पनवेल में कोयले के इंजन में शूट कर रहे थे और उस समय मुझे 103 डिग्री बुखार था। इन हालातों में मैंने 'किताब' की शूटिंग की। यह मेरी बहुत ही फेवरेट फिल्म है। 'किताब' को लोग बच्चों की फिल्म समझते है, लेकिन यह फिल्म बच्चों से ज्यादा माता-पिता के लिए थी।

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राजू श्रेष्ठ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
राजेश खन्ना के साथ आपने 'अमर प्रेम', 'बावर्ची' से लेकर 'दाग' तक बहुत सारी फिल्में कीं, उनके साथ काम करने के अनुभव कैसे रहे?
'अमर प्रेम' में राजेश खन्ना के साथ मेरा कोई सीन नहीं था। उनके साथ मेरा मुख्य काम फिल्म 'दाग' में हुआ। इसके बाद तो 'बावर्ची', 'चक्रव्यूह','पलकों की छाव में', और भी बहुत सारी फिल्मों में काम किया। जब मैं उनके साथ काम करता था, तब मुझे पता नहीं था कि वह इतने बड़े स्टार हैं। मेरे लिए वह सेट पर एक और अंकल थे। वह मेरे साथ खेलते रहते थे। सब लोग उनको काका कह कर बुलाते थे। मैं उनको काका अंकल कहकर बुलाता था। वह मुझसे कहते थे कि काका और अंकल का मतलब एक ही होता है। यह मुझे भी पता था, लेकिन जब उनको काका अंकल कहकर बुलाता था तो वे मेरे ऊपर हंसते थे। बोलते थे कि काका भी और अंकल भी। उनके साथ काम करने का बहुत अच्छा अनुभव रहा है, मैं चाहता था कि उनकी दूसरी पारी की शुरुआत होनी चाहिए थी। जैसे बाकी स्टार्स का हुआ। 

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राजू श्रेष्ठ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
यश चोपड़ा के साथ काम करने के अनुभव कैसे रहे?
यश जी के साथ मैने 'दाग', 'त्रिशूल' और 'दीवार' जैसी फिल्में की हैं। 'त्रिशूल' में अमित जी के और दीवार में शशि कपूर जी के बचपन का किरदार निभाया था। यश जी का 'दाग' के साथ करियर की शुरुआत हुई थी। 'दीवार' तक उनका बहुत बड़ा नाम हो गया था। बहुत अच्छा अनुभव रहा। मैं यश जी की क्या बात करूं, मैं अपने आपको काफी भाग्यशाली मानता हूं कि मैंने गुलजार साहब, बसु दा, ऋषिकेश मुखर्जी जैसे निर्देशकों के साथ भी काम किया है। तो दूसरी तरफ  यश चोपड़ा, डेविड धवन, अनुराग कश्यप, जैसे निर्देशकों के साथ काम किया। मेरा हर किसी के साथ काम करने का अनुभव बहुत अलग रहा है। सबके साथ सीखने का मौका मिला है। हर किसी के काम करने का तरीका अलग है। 
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राजू श्रेष्ठ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और फिल्म कलाकारों की काम करने की शैली में आपको क्या अंतर महसूस हुआ? 
अमित जी ( अमिताभ बच्चन ) पूरी तैयारी के साथ डायलॉग याद करके के सेट पर आते हैं। ऋषि कपूर बिल्कुल भी अपने डायलॉग याद करके नहीं आते थे। वह बहुत ज्यादा रिहर्सल में यकीन नहीं करते थे। अनिल कपूर खूब रिटेक देंगे और खूब मेहनत करेंगे, दूसरे एक्टर को भी अच्छे परफॉर्मेंस के लिए प्रेरित करेंगे। एक और बात इरफान खान साहब के बारे में बताना चाहूंगा। उनके साथ मैंने 'जय हनुमान' सीरियल किया था। उनकी एक्टिंग देख आपको लगता कि ऐसे ही सामान्य तरीके से बोल दिया गया है। लेकिन वह भी पूरी तरह से परफार्मेंस होती है। यह भी एक तरह की एक्टिंग होती है, जो आपको ऐसे महसूस कराई जाती है कि यह एक्टिंग नहीं है।
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राजू श्रेष्ठ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अशोक कुमार के साथ काम करने का कैसा अनुभव रहा? बासु चटर्जी के निर्देशन में बनी फिल्म 'खट्टा मीठा' में आपने काम किया था?
'खट्टा मीठा' मेरी फेवरेट फिल्म है। इसका शूटिंग शेड्यूल मेरे लिए बहुत ही यादगार रहा। शूटिंग एक ही शेड्यूल में पूरी हुई थी, इस दौरान जब भी समय मिलता था, हम लोग खूब खेलते रहते थे। हममें से जो सबसे ज्यादा शरारती बच्चे थे वह अशोक कुमार साहब थे। हमेशा उनके पास हर सिचुएशन पर एक गंदा जोक होता था। वह देखते भी नहीं थे कि उनके सामने कौन बैठा हुआ है। उम्र के उस पड़ाव पर भी वह बच्चों की तरह एक्टिव रहते थे, उनको अस्थमा था और पंप हमेशा साथ रखते थे, इसके बावजूद वह हमेशा गाने भी गाकर सुनाते थे। बाद में मुझे पता चला कि अशोक कुमार साहब एक ट्रेंड सिंगर थे। इतनी बीमारियों के बाद भी अपनी जिंदगी से बहुत प्यार करते थे।
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