फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rajkumar Rao Exclusive: ‘सिनेमा के चलने के लिए अच्छी नीयत का होना बहुत जरूरी है’

Wed, 13 Jul 2022 08:39 PM IST
वर्तिका तोलानी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
विज्ञापन
1 of 10
राजकुमार राव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

दक्षिण भारतीय फिल्मों के रिलीज के साथ ही अब हिंदी में भी रिलीज होने की परंपरा के पहले से कुछ हिंदी फिल्में ऐसी बनती रही हैं, जिनके मूल भाषाई संस्करण ओटीटी या यूट्यूब पर उपलब्ध हैं। ऐसी ही एक फिल्म है राजकुमार राव की अगली फिल्म ‘हिट द फर्स्ट केस’। शाहिद कपूर की फिल्म ‘जर्सी’ और शिल्पा शेट्टी की फिल्म ‘निकम्मा’ के न चलने की वजह यही बताई गई कि इन रीमेक की मूल फिल्में लोगों ने अपने मोबाइल पर पहले ही देख लीं। राजकुमार राव के लिए उनकी नई फिल्म ‘हिट द फर्स्ट केस’ बॉक्स ऑफिस पर उनका अपना ‘टेस्ट केस’ भी है। हालांकि राजकुमार कहते हैं कि वह पिछली फ्लॉप फिल्मों का ‘प्रेशर’ लेने की बजाय नई फिल्म की ओपनिंग पर ज्यादा फोकस करते हैं। राजकुमार राव से ‘अमर उजाला’ की एक खास बातचीत।

विज्ञापन

2 of 10
हिट द फर्स्ट केस टीम - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म 'हिट द फर्स्ट केस' जब पहले से ओटीटी पर उपलब्ध है तो इसकी हिंदी रीमेक को करने की वजह?
हां, मैंने भी अमेजन प्राइम वीडियो पर पर दो साल पहले ये फिल्म देखी थी। मुझे इसकी कहानी बहुत अच्छी लगी। शैलेश ने बताया कि वह इसको हिंदी में बनाकर अधिक दर्शकों तक पहुंचाना चाहते हैं। उनके मुताबिक उन्होंने कहानी में काफी बदलाव किए हैं और कहानी को एक नई ताजगी के साथ पेश किया है। मैंने भी फिल्म की कहानी देखने के साल भर से ज्यादा वक्त बाद इसकी शूटिंग शुरू की तो मैं भी कहानी भूल चुका था और मेरे लिए ये फिल्म एकदम नई कहानी है।

विज्ञापन

3 of 10
राजकुमार राव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

लेकिन, रीमेक फिल्में अब ज्यादा आकर्षित नहीं करतीं हिंदी सिनेमा के दर्शकों को.. 
मुझे लगता है कि हर फिल्म की अपनी किस्मत होती है। आपको सिर्फ एक अच्छी फिल्म बनाने की जिम्मेदारी मिली है तो हमने इस फिल्म में बखूबी वह जिम्मेदारी निभाई है। हमारी कोशिश यही है कि हम एक बहुत अच्छी फिल्म बहुत ही ईमानदारी से बनाएं। सबने बहुत ही मेहनत से काम किया है। अब रिलीज के बाद थियेटर में क्या होगा? बाक्स ऑफिस रिपोर्ट क्या होगी, यह बात न तो आपको पता है और न ही मुझे।

4 of 10
हिट द फर्स्ट केस टीम - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

जब आपकी कोई नई फिल्म रिलीज होती है तो कितना ‘प्रेशर’ होता है?
‘प्रेशर’ तो नहीं होता बस थोड़ी जिज्ञासा होती है कि शुक्रवार को कैसी ओपनिंग मिलेगी? मेरा मानना है कि ‘प्रेशर’ उस चीज का लो जो आपके हाथ में हो। फिल्म चलेगी कि नहीं चलेगी यह आपके हाथ में नही होता है। यह दर्शकों के हाथ में होता है इसलिए ‘प्रेशर’ लेकर कोई फायदा नहीं होता है।

विज्ञापन

5 of 10
राजकुमार राव - फोटो : instagram/rajkummar_rao

और, इतनी सारी मेहनत के बाद भी जब फिल्म का नतीजा अच्छा नहीं होता तो कभी जानने की कोशिश करते हैं कि चूक कहां हुई?
फिल्म को बनाने के दौरान अगर किसी एक की भी नीयत खराब हो जाए तो गड़बड़ हो जाती है और वह स्क्रीन पर दिखता है। सिनेमा के चलने के लिए अच्छी नीयत का होना बहुत जरूरी है। ‘न्यूटन’ में हम सबकी ऐसी नीयत थी कि एक अच्छी कहानी कहनी है। लेकिन उसमे अगर कोई आकार कहता कि इसमें एक डांस नंबर बढ़ा देते हैं तो फिल्म खराब हो जाती। अगर आपने 'बधाई दो' देखी है तो वहां फिल्म ऐसे मोड़ पर एंड कर रहे हैं, जहां सभी इमोशनल है और फिल्म खत्म होने के बाद एक ढिंचैक सॉन्ग चला दें तो सब खराब हो जाएगा। जहां मुझे लगता है कि मेरी बात सुनी जाएगी वहां ऐसे मौकों पर मैं सुझाव दे देता हूं लेकिन जहां लगता है कि मेरी बात नहीं सुनी जाएगी, वहां कुछ नहीं बोलता।

विज्ञापन

6 of 10
राजकुमार राव - फोटो : insta

बतौर एक हीरो, राजकुमार राव की यूएसपी क्या है?  
कभी इस पर मैंने गौर नहीं किया। ऐसा लोग बोलते रहते हैं कि अगर तुम फिल्म में हो तो फिल्म अच्छी होनी चाहिए। काम अच्छा होगा, कुछ क्वालिटी होगी तो हम फिल्म देखने आएंगे। इन सब बातों से और मेहनत करने की हिम्मत बढ़ती है। लगता है कि लोगो की उम्मीदों पर और खरा उतरना है। और अपने आप से भी यही उम्मीद होती है कि जब मौका मिले, हर फिल्म में कुछ अलग करना है। जितना हो सके दोहराव से बचना चाहिए क्योंकि वह बहुत बोरिंग होता है।

विज्ञापन

7 of 10
राजकुमार राव - फोटो : insta

और, राजकुमार राव के नाम से कितनी जिम्मेदारी बढ़ जाती है?
जिम्मेदारी तो अच्छा काम करके ही निभेगी। इसका कोई दूसरा रास्ता नहीं है। अगर अच्छी कहानी नहीं करूंगा, अच्छे से मेहनत नहीं करूंगा तो जिम्मेदारी चली जाएगी। लोग मेरी फिल्में देखना बंद कर देंगे फिर काम करने का कोई फायदा नहीं होगा। आप घर पर बैठकर खुद देखने के लिए फिल्में नहीं बना रहे हैं। आप जो भी काम करे कोशिश यही होनी चाहिए कि वो दर्शकों तक पहुंचे। हर कलाकार यही चाहता है। अगर दर्शकों की अपेक्षाएं आप से बढ़ रही हैं तो उसे आपको छोड़ना नहीं है कभी। 

8 of 10
राजकुमार राव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

हर स्टार का अपना एक 'प्लान बी'  भी होता है, अभिनय के अलावा और भी बहुत सारे व्यवसाय में वह खुद को व्यस्त रखते हैं। आपने भी कभी ऐसा कुछ सोचा है?
नहीं, अभी तो पूरा ध्यान सिर्फ एक्टिंग पर ही है। और इसी पर ही केंद्रित रखना है। दूसरा बिजनेस करने का ख्याल इसलिए अभी तक नहीं आया क्योंकि मैं सोचता हूं, जो अभी कर रहा हूं, उसी पर मेरा पूरा फोकस रहे। ऐसा नहीं हो पाता है कि शूटिंग से थक-हार के आओ फिर बिजनेस के लिए मीटिंग करो। मेरा कभी प्लान बी रहा ही नहीं। मेरा प्लान ए ही रहा है शुरू से, और वह एक्टिंग ही है।

9 of 10
राजकुमार राव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

हंसल मेहता के साथ आपके रिश्ते जगजाहिर हैं, और किसी निर्देशक के साथ भी ऐसी ट्यूनिंग है क्या?
हंसल मेहता के साथ तो शुरू से ही बहुत अच्छे संबंध रहे हैं। उनके साथ सिर्फ कारोबारी ही नहीं बल्कि पारिवारिक रिश्ता रहा है। ऐसा नहीं है कि काम हो तो ही उनसे मिलें। अभी अनुभव सिन्हा के साथ मैंने एक फिल्म 'भीड' पूरी की है। उनके साथ भी ऐसा रिश्ता बन गया है। अगर मैं जल्दी फ्री हो जाता हूं तो उनको फोन कर देता हूं। हम मिलते हैं, कॉफी पीते है और दुनिया भर के इधर उधर की बातें करते हैं।

विज्ञापन

10 of 10
राजकुमार राव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अब तक किस किरदार को निभाना सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहा?
मैंने सुभाष चंद्र बोस की बायोपिक सीरीज की थी, ‘बोस डेड/अलाइव’। इसके लिए मुझे अपना वजन बढ़ाना था। जब उस फिल्म के लिए गंजा हुआ तो लोग कह रहे थे कि गंजे होने की क्या जरूरत है, विग पहन लेते, अगर दोबारा बाल नही आए तो क्या होगा? मैंने कहा, यह एक ऐसा किरदार है जिसके साथ कभी बेईमानी नहीं की जा सकती।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें