राज कपूर की फिल्म 'आवारा'
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शीत युद्ध का समय-‘आवारा’ की दस्तक
साल 1945 में दूसरा विश्व युद्ध खत्म हुआ, इस युद्ध में कई बड़े देश शामिल थे, जिनमें से रूस भी एक था। इस युद्ध के कारण रूसी लोगों ने काफी कुछ खोया, साथ ही युद्ध का मनोवैज्ञानिक असर भी उनके जीवन पर हुआ। इसी के साथ रूस और अमेरिका के बीच कोल्ड वॉर यानी शीत युद्ध भी छिड़ गया, यह एक तरह का वॉर है लेकिन सीधा ना लड़कर, राजनीतिक तरीकों से लड़ा जाता है। ऐसे में रूसी लोगों के जीवन में एक तरह की निराशा मौजूद रहने लगी। साथ ही देश कई तरह की समस्याओं का भी सामना कर रहा था, जिसमें गरीबी,असमानता जैसी बातें शामिल थी। ऐसे में फिल्म ‘आवारा (1951)’ साल 1954 में रूस में रिलीज हुई। फिल्म देखकर रूसी दर्शक इसके दीवाने हो गए। यह फिल्म उनके जीवन में एक आशा की किरण बनकर आई, जिसने पल भर के लिए सही उनके मन को खुशी से भर दिया। रूसी दर्शक फिल्म ‘आवारा’ के गीत ही गुनगुनाते हुए नजर आने लगे। इसे इस तरह से भी देख सकते हैं कि मुश्किल समय में एक फिल्म ने उन्हें खुश होने का मौका दिया, अपनी परेशानियों को भूला देने का मौका दिया। यही बातें फिल्म ‘आवारा’ की सफलता का कारण बनीं।