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जीवन के आखिरी दिनों में बिलकुल अकेले पड़ गए थे पंचम दा, शम्मी कपूर की फिल्म 'तीसरी मंजिल' से हुए हिट

Thu, 27 Jun 2019 11:53 AM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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R. D. Burman - फोटो : Social Media

भारतीय फिल्म जगत में हमेशा याद रहने वाले नामों में से एक हैं राहुल देव बर्मन, जिनके नाम और काम से शायद ही कोई अनजान हो। पंचम दा से पहले और पंचम दा के बाद अब तक कोई ऐसा नहीं हुआ जिसने फिल्म इंडस्ट्री को इतने बेहतरीन और लाजवाब गाने दिए हों। 60 के दशक से 80 के दशक तक कई सुपरहिट गीत रचने वाले राहुल देव बर्मन यानी आर डी बर्मन का जन्म 27 जून 1939 को हुआ था।

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R D Burman
फिल्मी दुनिया में आर डी बर्मन 'पंचम दा' के नाम से विख्यात थे और उन्होंने अपने करियर के दौरान लगभग 300 फिल्मों में संगीत दिया। आर डी बर्मन के पिता सचिन देव बर्मन जाने-माने संगीतकार और गायक थे और उनकी मां मीरा भी गीतकार थीं। आर डी बर्मन को फिल्मों में पहला ब्रेक महमूद की फिल्म 'छोटे नवाब' में मिला था। 
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R. D. Burman - फोटो : Social Media
पंचम दा ने महमूद की फिल्म 'भूत बंगला' में एक्टिंग भी की थी। आर डी बर्मन को मिर्ची खाने का शौक था और वह अपने नर्सरी गार्डन में अलग-अलग तरह की मिर्ची उगाते थे। महज 9 साल की उम्र में पंचम दा ने अपना पहला संगीत “ऐ मेरी टोपी पलट के” को दिया, जिसे फिल्म “फ़ंटूश” में उनके पिता ने इस्तेमाल किया। कम ही लोगों को इस बात की जानकारी है कि आर डी ने जब पहली बार लता मंगेशकर को देखा, तो वह शॉर्ट्स पहने हुए ही उनका ऑटोग्राफ लेने आ गए थे।

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pancham

शम्मी कपूर की फिल्म 'तीसरी मंजिल' में आर डी बर्मन ने बेहतरीन संगीत दिया था और इसके सारे गाने सुपरहिट हुए थे। इसी फिल्म के बाद से फिल्म इंडस्ट्री में आर डी बर्मन के नाम की धूम मच गई। शायद आप नहीं जानते होंगे कि आर डी बर्मन बर्मन को सबसे पहले निरंजन नामक फिल्मकार ने ‘राज’ के लिए 1959 में साइन किया था। आरडी ने दो गाने रिकॉर्ड भी किए। पहला गाना आशा भोसले और गीता दत्त ने तथा दूसरा शमशाद बेगम ने गाया था। यह फिल्म बाद में बंद हो गई।

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पंचम दा अपने जीवन के आखिरी दिनों में बिलकुल अकेले पड़ गए थे। इतनी कामयाबी पाने के बावजूद, संगीत और फिल्म जगत के कई नामचीन लोगों के इतने करीबी होने के बाद भी ऐसा हुआ। 80 के दशक में कुछ नाकामयाबी हाथ लगने के बाद आर डी बर्मन को फिल्में नहीं मिल रहीं थीं। काफी लंबे समय बाद 90 के दशक की शुरुआत में उन्हें विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म '1942 अ लव स्टोरी' में संगीत देने का मौका मिला। फिल्म के सारे गाने सुपरहिट साबित हुए लेकिन अफसोस कि इसकी कामयाबी देखने के लिए खुद आर डी बर्मन जिंदा नहीं थे।
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