मिथुन चक्रवर्ती
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
मिथुन ने लिया करियर का बड़ा रिस्क
हिंदी सिनेमा में इस कालखंड को शब्बीर कुमार काल से जाना जाता है। शब्बीर कुमार कैसे हिंदी सिनेमा में आए, कैसे वह पार्श्वगायकों को लेकर शुरू से चलती आने वाली राजनीति में संगीतकारों के लिए तुरुप का मोहरा साबित हुए और कैसे क्लब में गाने वाला एक गायक, हिंदी सिनेमा का नंबर वन गायक बन गया, इस पर एक बेहद शानदार म्यूजिकल फिल्म बन सकती है। लेकिन, फिल्मों की कहानियां फिल्म 'प्यार झुकता नहीं' के दौर में भी दाएं बाएं से मार ली जाती थीं। ये वह दौर था जब वीएचएस पूरे देश में शहरों से गांवों तक पैर पसार चुका था। उन्हीं दिनों लेखक और गीतकार शमशुल हुदा बिहारी (एस एच बिहारी) को एक पाकिस्तानी फिल्म देखने को मिली ‘आइना’, इसका जिक्र उन्होंने मिथुन चक्रवर्ती से किया। मिथुन उन दिनों के सुपर सितारे थे। बॉक्स ऑफिस पर उनकी तूती बोलती थी। मिथुन और एस एच बिहारी की जान पहचान फिल्म ‘कराटे’ के दौरान गहरी हुई और जब ‘आइना’ की कहानी सामने आई तो दोनों को ये मिथुन के अगले दौर की नींव बनाने वाली फिल्म लगी।