प्रियंका चोपड़ा
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'याद रखिए कि सांस लेना भी एक विशेषाधिकार है, क्योंकि दुनिया भर के लोगों को उनकी त्वचा के रंग, जेंडर या उनकी धार्मिक मान्यताओं के अलावा किसी अन्य कारण से सताया जाता है। बदलाव लाने के लिए सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोवर्स की जरूरत नहीं है। बस आपकी इच्छाशक्ति होनी चाहिए। कोई भी कदम छोटा नहीं होता। कोई भी उम्र कम नहीं होती।'