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'कश्मीरी देखते हैं गंदी फिल्में' बयान पर भड़के बॉलीवुड निर्माता, नीति आयोग के सदस्य को फटकारा

Tue, 21 Jan 2020 07:26 PM IST
anand anand एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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नीति आयोग के सदस्य वीके सारस्वत - फोटो : ANI
कश्मीर में इंटरनेट पर लगी पाबंदी पर नीति आयोग के सदस्य वीके सारस्वत के एक बयान पर चौतरफा निंदा हो रही है। बीते दिनों मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि अगर कश्मीर में इंटरनेट पर पाबंदी है तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता वैसे भी उस पर गंदी फिल्में ही देखी जाती है। उन्होंने कहा, 'अगर कश्मीर में इंटरनेट न हो तो क्या फर्क पड़ता है? आप इंटरनेट पर क्या देखते हैं? वहां क्या ई-टेलिंग हो रही है? गंदी फिल्में देखने के अलावा आप उस पर (इंटरनेट) कुछ भी नहीं करते हैं। 
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Pritish Nandy
वीके सारस्वत के इस बयान की बॉलीवुड निर्माता-निर्देशक प्रीतिश नंदी ने अलोचना की है। वीके सारस्वत पर निशाना साधते हुए उन्होंने ट्विटर पर लिखा, 'वाकई मिस्टर सारस्वत? सच में? और आप नीति आयोग के सदस्य हैं ? भारत के एक राज्य के लोगों के बारे में बात करने का आपका यह तरीका है, जो अब सिर्फ एक केंद्र शासित प्रदेश बनकर रह गया है?' प्रीतिश नंदी के इस ट्वीट की सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है। कई सोशल मीडिया यूजर्स उनके ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। 
 

 
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VK Saraswat - फोटो : social media
बता दें कि वीके सारस्वत ने अपने बयान में ये भी कहा था कि नेता दिल्ली की तरह कश्मीर में आंदोलन करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'ये जो नेता वहां जाना चाहते हैं वह इसलिए जाना चाहते हैं ताकि जो आंदोलन दिल्ली की सड़कों पर हो रहा है वह उसे वहां कर सकें। सारस्वत ने कहा, 'एक तरीका होता है। कश्मीर में इंटरनेट बंद है क्योंकि उसकी एक वजह है। कश्मीर में अगर अनुच्छेद 370 को हमें प्रख्यात करना है और कश्मीर को एक राज्य के तौर पर आगे लाना है तो हमें मालूम है कि वहां कुछ ऐसे लोग हैं, कुछ ऐसे तत्व हैं जो इस तरह की सूचना का दुरुपयोग करेंगे। हम वहां जो कानून व्यवस्था लाना चाहते हैं वह उसे खराब करेंगे।' 

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Pritish Nandy - फोटो : social media
वहीं बीते दिनों वीके सारस्वत जम्मू-कश्मीर के लोगों के लेकर विवादस्पद बयान दिया था तो उनकी हर किसी ने आलोचना की थी। जिसे बाद उन्हें अपनी सफाई तक देनी पड़ी। वीके सारस्वत ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि मेरे बयान का गलत अर्थ निकाला गया है। अगर इस गलतफहमी ने कश्मीर के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, तो मैं माफी मांगता हूं। कश्मीर के लोग यह नहीं समझे कि मैं कश्मीरियों को इंटरनेट सुविधा देने के खिलाफ हूं।
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VK Saraswat - फोटो : social media
बता दें कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पूरे प्रदेश में बंद प्रीपेड मोबाइल सेवा पांच महीने बाद बहाल कर दी गई है। इस पर एसएमएस सुविधा भी मिलेगी। जम्मू संभाग के सभी 10 जिलों तथा कश्मीर संभाग के दो जिलों कुपवाड़ा व बांदीपोरा में 2जी मोबाइल इंटरनेट सेवा शुरू कर दी गई है। मोबाइल इंटरनेट का लाभ केवल पोस्टपेड मोबाइल उपभोक्ता ही उठा सकेंगे। सरकार के प्रवक्ता रोहित कंसल ने बताया कि 153 वेबसाइट की सूची (व्हाइट लिस्ट) जारी की गई है, जिनका उपभोक्ता लाभ उठा सकेंगे। सभी मोबाइल कंपनियों को जरूरी हिदायत दे दी गई है।  

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