गुलाबो सिताबो
- फोटो : Amar Ujala, Mumbai
पश्चिमी भारत में अंग्रेजी कंटेंट की खपत बढ़ी है जबकि दिल्ली उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ जैसे राज्यों में हिंदी मनोरंजन पर खर्चे में वृद्धि साल दर साल दहाई का अंक छू रही है, इन नए लोगों तक प्राइम वीडियो कैसे पहुंच रहा है?
हां, आश्चर्य हमें भी इस बात पर होता है कि दक्षिण भारतीय भाषाओं में बनी सामग्री के ग्राहक अब उनके अपनी भाषा वाले राज्यों जितने ही दूसरे राज्यों से भी आ रहे हैं। मतलब कि तेलुगू में बना कंटेंट जितना वहां के लोग देख रहे हैं, करीब करीब उतने ही दर्शक इसे दूसरी जगहों के भी देख रहे हैं। डिजिटल में ये भारतीय भाषाओं के यौवन का समय है। हमारी विपणन नीति भी इसी तरह काम करती है। मशहूर सितारों को चाहने वालों के बीच हम जाते हैं। ‘शकुंतला देवी’ में हमने विद्या बालन के साथ मिलकर उनके चाहने वालों के साथ काफी प्रयोग किए और इसका हमें फायदा भी मिला। ‘गुलाबो सिताबो’ की जटिल जिह्वा प्रतियोगिताएं भी खूब लोकप्रिय हुईं। हम लगातार सीख रहे हैं। हम ये भी सीख रहे हैं कि भारतीय भाषाओं यानी कि स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध सामग्री ही असली गेमचेंजर है।