shubh mangal zyada saavdhan
- फोटो : Amar Ujala, Mumbai
वहीं बात करें फिल्म 'शुभ मंगल ज्यादा सावधान' की तो ये हिंदी सिनेमा जगत की उन चुनिंदा फिल्मों में से एक है जिनमें समलैंगिक रिश्तों को लेकर समाज में पनप रही नकारात्मक सोच पर कटाक्ष किया गया है। आयुष्मान पहले ही बता चुके हैं कि समाज में यह एक ऐसा विषय है जिसके बारे में खुलकर बात करनी बहुत जरूरी है। यह प्रत्येक व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह किस तरह की जिंदगी जीना चाहता है और किसके साथ जीना चाहता है। सिनेमा के दृष्टिकोण से सिर्फ यह बात ध्यान रखनी चाहिेए की ऐसे विषयों को मनोरंजन के साथ परोसना चाहिए, नहीं तो फिल्म और डॉक्यूमेंट्री में कोई फर्क नहीं रह जाएगा।