मणिरत्नम
मणिरत्नम ने आगे कहा कि हमने इस तरह की फिल्मों को बहुत पहले ही स्वीकार कर लिया था, जबकि उत्तर के बाकी हिस्सों ने साउथ फिल्मों को देखना, सराहना करना, प्रोत्साहित करना और उन्हें विकसित करना बहुत बाद में सीखा। यह हमारे आगे बढ़ने का एक हिस्सा है और कांतारा जैसी फिल्मों को रीजनल भाषा में देखना, संस्कृति के बारे में बात करना और इसको बेहतर प्रदर्शन करते हुए देखना हेल्दी है।