अक्सर आपने सुना होगा कि 'सपनों की मायानगरी मुंबई में हरदिन सैकड़ों लोग आंखों में स्टार बनने का सपना लेकर पहुंचते हैं।' लेकिन इसके आगे की बात ये है कि ऐसे ही सैकड़ों सपने यहां रोज टूटते हैं और वो टूटे सपने हररोज अपने घरों की ओर लौट जाते हैं। स्टार बनना और स्टारडम कायम रखना, इस बात में बड़ा फर्क है। इसे जो न समझ पाया वो ऐसा गुमनाम हुआ कि मौत पर चार कंधे भी न जुटा सका। आज बात बॉलीवुड की चमचमती नगरी के उस गुप अंधेरे कमरे की जहां सैकड़ों सांसें चुपचाप दफन हो गईं। ये भयानक और बहुत भयानक है।