परेश रावल
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केतन मेहता, महेश भट्ट और राहुल रवैल जैसे निर्देशकों संग काम करने के कैसे अनुभव रहे?
केतन भाई मुझे रंगमंच से जानते हैं, उन्होंने मेरे नाटक देखे हैं। मेरे नाटक भी उन्होंने निर्देशित किए है। केतन भाई के साथ मेरा जो समय बीता है वह मेरे लिए बड़ा ही महत्वपूर्ण समय रहा है। एक कलाकार के रूप में मेरा वह स्वर्ण काल रहा, मैने बहुत कुछ सीखा। कभी कभी केतन भाई जो बात बोलते हैं, आपको समझ में नहीं आती है, लेकिन आप के जेहन में वह बातें पड़ी पड़ी आकार ले लेती है और एक दिन समझ में आता है कि अरे, हां इसका मतलब तो यह था। उन्होंने सही दिशा दिखाई। मैं किसी एक्टिंग स्कूल में नहीं गया। जो कुछ सीखा है थियेटर और बड़े कलाकारों को देखकर सीखा है। केतन भाई के साथ मैंने 'होली', 'मिर्च मसाला' और 'सरदार' जैसी फिल्में की, तो वही महेश भट्ट की फिल्म 'नाम' और राहुल रवैल की फिल्म 'डकैत' से मेरी अलग पहचान बनी।