पंकज त्रिपाठी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पंकज त्रिपाठी बताते हैं, "इसके बाद जब मैंने गांव का दौरा किया तो मैं स्कूल भी गया। मैंने देखा कि स्कूल के कुछ हिस्सों का प्लास्टर गिर रहा था, रंग फीके पड़ गए थे, रोशनी और पंखे ठीक से काम नहीं कर रहे थे। मुझे लगा कि यह भी किया जाना चाहिए। तब मैंने अपने पिता पंडित बनारस तिवारी के नाम से बने ट्रस्ट के जरिये स्कूल के बुनियादी ढांचे को सुधारने और उसको उन्नत करने की पहल की। मैंने भी इसी स्कूल में पढ़ाई की थी। उम्मीद यही है कि शिक्षा का बुनियादी ढांचा ठीक होने से आसपास के बेटे बेटियां भी पढ़ाई में रुचि दिखाएंगे।"