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बिहार में बच्चों की मौत पर छलका पंकज त्रिपाठी का दर्द, बोले- 'विचलित महसूस कर रहा हूं'

Sat, 22 Jun 2019 05:50 PM IST
शिप्रा सक्सेना एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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Pankaj Tripathi - फोटो : file photo
बिहार में चमकी बुखार से बच्चों की मौत का आंकड़ा 160 से ऊपर पहुंच गया है। जबकि अकेले मुजफ्फरपुर के सरकारी अस्पताल में मरने वाले मासूमों की संख्या 128 हो गई है। बिहार में फैले इस चमकी बुखार को लेकर आम हो खास हर कोई परेशान है। इस कड़ी में बिहार से ताल्लुक रखने वाले बॉलीवुड एक्टर पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) ने ट्वीट कर इस पर दुख जताया। एक्टर ने अपने इस ट्वीट में लिखा कि सरकार और हम सबको माफी मांगनी चाहिए।
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Pankaj Tripathi - फोटो : file photo
पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) ने ट्वीट किया- 'मुजफ्फरपुर की घटना ने अंदर तक झकझोर कर रख दिया है। बहुत विचलित महसूस कर रहा हूं। समझ नहीं आता किस-किस को दोष दें, एक देश, एक राज्य, एक समाज और एक व्यक्ति हर स्तर पर हमारी असफलता है यह। हम किस सदी में जी रहे हैं? आत्मा को गिरवी रखकर इमारते खड़ी कर लेना विकसित होना कैसे हो सकता है? सरकार, अधिकारी, सिस्टम, समाज, आप और हम सबको माफी मांगनी चाहिए बच्चों से।' 
 

 
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बिहार में दिमागी बुखार का कहर - फोटो : PTI
पंकज त्रिपाठी (Pankaj Tripathi) के इस पोस्ट पर यूजर्स भी कमेंट कर रहे हैं। चमकी बुखार से श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) अस्पताल में 108 और केजरीवाल अस्पताल में 20 लोगों की मौत हुई है। इस बीमारी से अबतक 500 से ज्यादा बच्चे प्रभावित हुए हैं। बिहार में तेजी से फैल रहे चमकी (एक्यूट इनसेफ्लाइटिस सिंड्रोम) बुखार को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जिला व ब्लाक स्तरीय अधिकारियों और चिकित्साधिकारियों को सतर्क रहने को कहा है।

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एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम बिहार में बच्चों पर कहर बनकर टूट रहा है - फोटो : PTI
इस मुद्दे को लेकर राजनीति भी गर्माई हुई है। शुक्रवार को एईएस का मु्द्दा संसद के दोनों सदनो में उठाया गया था। राज्यसभा में मृतक बच्चों को श्रद्धांजलि भी दी गई थी। डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी का कोई सटीक इलाज नहीं हैं। वहीं जो बच्चे इस बीमारी को मात देकर ठीक हो गए हैं उनपर भविष्य में इस बीमारी का असर दिखाई दे सकता है।
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बिहार में दिमागी बुखार का कहर - फोटो : PTI
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार मुजफ्फरपुर जिले के गंगापुर गांव की रहने वाली अनुसूचित जाति की मुना देवी के नाती को दो साल पहले एईएस ने जकड़ लिया था। हालांकि वह इस बीमारी के चंगुल से बचने में कामयाब रहा लेकिन वह दोबारा पहले की तरह सामान्य नहीं रहा। उसमें जल्द ही मानसिक बीमारी के लक्षण दिखाई देने लगे। मुना देवी ने कहा, 'कभी वह सामान्य व्यवहार करता है। लेकिन कभी नहीं करता। जब हमने डॉक्टरों से पूछा तो उन्होंने कहा कि दिमागी बुखार के कारण ऐसा हो रहा है।'
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