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इन 11 फिल्मों में पंकज कपूर की अदाकारी की दी जाती हैं मिसालें

Wed, 29 May 2019 11:13 AM IST
अरविंद अरविंद एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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पंकज कपूर - फोटो : सोशल मीडिया
हिंदी सिनेमा में किरदारों को गंभीरता से जीने वाले अभिनेता पंकज कपूर का नाम सबसे बेहतरीन अभिनेताओं की श्रेणी में रखा जाता है। 29 मई 1954 को पैदा हुए पंकज राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) से स्नातक हैं। पंकज ने सिनेमा, थिएटर, और टीवी तीनों जगह अपने अभिनय का जौहर दिखाया।

टेलीविजन पर उनके सीरियल करमचंद और ऑफिस ऑफिस किवदंती बन चुके हैं। अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके पंकज ने अपने बेटे शाहिद कपूर को उन्होंने फिल्म मौसम में निर्देशित भी किया। उनके जन्मदिन पर आइए जानते है कुछ ऐसी फिल्मों के बारे में जो हिंदी सिनेमा में अदाकारी की मिसाल हैं। देखिए आगे की स्लाइड्स।
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बॉलीवुड - फोटो : सोशल मीडिया

जाने भी दो यारों (1983)

किरदार- तरनेजा

1983 में कुंदन शाह के निर्देशन में बनी कॉमेडी फिल्म जाने भी दो यारों मे पंकज कपूर एक बेलौस अंदाज में नजर आए। इस फिल्म में एक बेईमान बिल्डर तरनेजा का किरदार निभा रहे पंकज ने अपनी अदाकरी का उम्दा प्रदर्शन किया। इस फिल्म में पंकज के अलावा नसीरुद्दीन शाह, रवि वासवानी, ओम पुरी, नीना गुप्ता, भक्ति बर्वे और सतीश कौशिक जैसे उस समय के उभरते कलाकारों ने काम किया था। भारतीय राजनीति पर तगड़ा व्यंग्य करने वाली इस फिल्म के लिए निर्देशक कुंदन शाह को इंदिरा गांधी बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया। 

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बॉलीवुड - फोटो : सोशल मीडिया

खामोश (1985)

किरदार- कुक्कू

विधु विनोद चोपड़ा की बतौर निर्माता, निर्देशक यह पहली फिल्म रही। इसके पहले विधु सजा ए मौत बना चुके थे लेकिन इस फिल्म ने उन्हें दमदार निर्देशक के रूप में स्थापित किया। फिल्म को किसी वितरक ने जब नहीं खरीदा तो विधु ने मुंबई में रीगल सिनेमाघर किराए पर लेकर खुद ये फिल्म रिलीज की। अमोल पालेकर, नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी और सोनी राजदान जैसे कलाकारों के बीच पंकज कपूर ने एक मानसिक रोगी की भूमिका अपनी अलग छाप छोड़ी। 

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pankaj kapoor and supriya pathak

जलवा (1987)

किरदार- अलबर्ट पिंटो

खामोश के दो साल बाद पंकज कपूर 1987 में पंकज पराशर के निर्देशन में बनी फिल्म जलवा में  एक बार फिर से नसीरुद्दीन शाह के साथ नजर आए। हॉलीवुड फिल्म बेवर्ली हिल से प्रेरित इस फिल्म की हीरोइन थीं अर्चना पूरन सिंह और उन दिनों दूरदर्शन पर अंग्रेजी में समाचार पढ़ने वाले तेजेश्वर सिंह फिल्म में विलेन बने थे। फिल्म में पंकज कपूर ने अलबर्ट पिंटो के इस किरदार से खूब सराहाना बटोरी थी। 

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बॉलीवुड - फोटो : सोशल मीडिया

राख (1989)

किरदार- इंस्पेक्टर पीके

पीके फिल्म तो आमिर खान ने बहुत बाद में बनाई लेकिन बतौर अभिनेता उनकी पहली सुपर हिट फिल्म कयामत से कयामत तक से पहले बनी फिल्म राख में पंकज ने इसी नाम के एक पुलिस इंसपेक्टर का किरदार निभाया। एक बेचारे पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका निभा रहे पंकज को इस किरदार के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर का बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर खिताब भी मिला। 

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बॉलीवुड - फोटो : सोशल मीडिया

रोजा (1992)

किरदार- लियाकत 

मणिरत्नम जैसे गुणी निर्देशक के निर्देशन में पंकज ने इस फिल्म में कमाल का अभिनय किया। इस फिल्म ने ही भारतीय सिनेमा में पाकिस्तान को विलेन के तौर पर पेश करने की शुरूआत की, फिल्म में पंकज ने एक पाकिस्तानी आतंकवादी का किरदार निभाया था। यह पहली दक्षिण भारतीय फिल्म रही, जिसने हिंदी में डब होने के बाद जबर्दस्त कारोबार किया। ए आर रहमान से भी हिंदी सिने दर्शकों का इसी फिल्म से परिचय हुआ। इस फिल्म ने नरगिस दत्त बेस्ट फीचर फिल्म सहित तीन राष्ट्रीय पुरस्कार जीते।

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बॉलीवुड - फोटो : सोशल मीडिया

मकबूल (2009)

किरदार- जहांगीर खान उर्फ अब्बाजी

शेक्सपीयर के नाटक मैकबेथ पर आधारित फिल्म मकबूल में पंकज कपूर का किरदार काफी महत्वपूर्ण रहा। विशाल भारद्वाज के निर्देशन में बनी फिल्म मकबूल मे पंकज ने जहांगीर खान उर्फ अब्बाजी का किरदार निभाया। 2003 में टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित इसी फिल्म से विशाल भारद्वाज को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली। इस फिल्म में पंकज के साथ साथ इरफान खान, तब्बू, ओम पुरी,नसीरुद्दीन शाह और पीयुष मिश्रा जैसे उत्कृष्ट कलाकार मुख्य भूमिका में थे। मुंह में पान लिए एक डॉन के किरदार में पंकज को इस फिल्म के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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द ब्लू अम्ब्रेला (2005)

किरदार- नंदकिशोर खत्री उर्फ नंदू

रस्किन बॉन्ड के उपन्यास द ब्लू अम्ब्रेला पर आधारित इस फिल्म में पंकज कपूर ने एक बार फिर विशाल भारद्वाज के निर्देशन में काम किया। फिल्म को बेस्ट चिल्ड्रन फिल्म के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। फिल्म में पंकज के साथ साथ श्रेया शर्मा और राहुल कुमार मुख्य भूमिका में थे। 

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सहर (2005)

किरदार- प्रो. भोले शंकर तिवारी

पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी श्रीप्रकाश शुक्ला पर बनी इस फिल्म में पंकज कपूर ने एक प्रोफेसर के तौर पर मोबाइल ट्रैकिंग करने वाला किरदार निभाया। फिल्म के हीरो अरशद वारसी का किरदार दरअसल रीयल लाइफ पुलिस अफसर अरुण कुमार पर आधारित है। अरुण कुमार ने ही देश में पहली बार मोबाइल ट्रैकिंग तकनीक से किसी अपराधी का पता लगाया। लेकिन, फिल्म में उनकी इस काबिलियत को एक अलग किरदार में तब्दील कर दिया गया। फिल्म में पंकज कपूर का अभिनय खूब सराहा गया।

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हल्ला बोल (2008)

किरदार- सिद्धू

अजय देवगन और विद्या बालन जैसे दमदार सितारों के बीच पंकज कपूर ने इस फिल्म में कलाकारी का कमाल दिखाया। राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को चोट करती इस फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया। एक डकैत का किरदार निभा रहे पंकज ने इस इस फिल्म में अपनी एक्टिंग के दम पर खूब सराहना पाई। 

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मटरू की बिजली का मंडोला (2013)

किरदार- हरपूल सिंह मंडोला उर्फ हैरी

अपने निर्देशकों के हाथों खुद को सौंप देने की पंकज कपूर की शुरू से आदत रही है और इसी आदत ने पंकज को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया विशाल भारद्वाज की फिल्म मटरू की बिजली का मंडोला ने। फिल्म में पंकज के अलावा इमरान खान, अनुष्का शर्मा, शबाना आजमी और आर्य बब्बर मुख्य भूमिका में थे। हरपूल सिंह मंडोला उर्फ हैरी के किरदार में पंकज ने जबर्दस्त काम किया। लेकिन, फिल्म के बाकी किरदार ढीले रह गए और फिल्म फ्लॉप हो गई। हालांकि पंकज को इस फिल्म के लिए फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नॉमीनेशन जरूर हासिल हुआ था।

 

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टोबा टेक सिंह (2018) 

किरदार- टोबा टेक सिंह

पंकज कपूर हर क्रिएटिव इंसान की तरह हमेशा बेचैन रहते हैं। नए नए किरदार करने की उनकी बेचैनी अब भी कायम है। पिछले साल वह सआदत हसन मंटो की लघु कहानी पर आधारित फिल्म टोबा टेक सिंह में नजर आए। केतन मेहता के निर्देशन में बनी इस फिल्म को भारत पाक विभाजन से पहले की पृष्ठभूमि पर बनाया गया है। इस फिल्म में भी पंकज का अभिनय शानदार रहा और इसके लिए उन्हें फिल्म समीक्षकों की खूब सराहना मिली। 

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