पंचायत की रिंकी
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सीरीज में बेटी की शादी को लेकर मां की एजयूजुअल चिंता दिखाई गई, लेकिन पिता यानी प्रधान जी बार-बार बेटी के भविष्य और अच्छे जीवनसाथी का जिक्र करते हैं? आमतौर पर यह कल्चर शहरों का है। क्या आपको लगता है कि बेटियों की शादियों के प्रति अब गांवों में भी माहौल बदलने लगा है?
जी हां, पहले के मुकाबले गांवों का माहौल काफी हद तक बदल गया है। वहां के लोग काफी जागरूक हो गए हैं। लेकिन हां, कहीं-कहीं आज भी लोगों को लड़कियों की शादी की हड़बड़ी होती है। जैसे ही लड़की 18 साल की होती है, वैसे ही उसके लिए रिश्ते आने लगते हैं। मां-बाप पर समाज यह कहकर शादी का दबाव डालने लगता है कि ‘अरे अब तो ये बड़ी हो गई है, अब तो इसकी शादी करवा देनी चाहिए’ आदि। हालांकि अब यह सोच बदल रही है। पहले तो एक समय ऐसा था जब हमारी पूरी जिंदगी शादी के इर्द-गिर्द ही प्लान की जाती थी। लेकिन अब धीरे-धीरे लोगों की सोच में बदलाव आ रहा है। हां, एक उम्र के बाद शादी का दबाव अब भी बना रहता है, फिर चाहे वो लड़का हो, या लड़की। लेकिन यह भी समय के साथ बदल जाएगा।