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'पैडमैन' पर खुलकर बोलीं राधिका आप्टे,‘आदमी दर्द में तो जी सकता है लेकिन शर्म में नहीं ’

Sun, 11 Feb 2018 01:16 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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फिल्म 'पैडमैन' से बॉलीवुड इंडस्ट्री में क्रांति लाने वाले अक्षय कुमार और राधिका आप्टे ने सैनिटरी नैपकिन को लेकर कई बयान दिए हैं। बता दें, फिल्म 'पैडमैन' की स्टार कास्ट लगातार इस बीच महिलाओं की सेहत और स्वच्छता के बारे में लोगों से खुलकर बात कर रही हैं। हाल ही में फिल्म अभिनेत्री राधिका आप्टे ने इस समस्या से जुड़ी कई बोल्ड बातें कही। 

 
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अक्षय कुमार की ऑनस्क्रीन पत्नी राधिका आप्टे ने अपने एक इंटरव्यू में कहा,‘माहवारी को शर्म के चोले में किसने लपेटकर रखा है? पुरुषों में तो इसे लेकर जानकारी का अभाव शुरू से रहा है, महिलाएं ही हैं, जो अपनी बहू, बेटियों में माहवारी को लेकर शर्म बढ़ा रही हैं।’  

 
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राधिका आप्टे ने कहा, ‘पैडमैन’ भारतीय सिनेमा के इतिहास की शायद पहली फिल्म है, जिसने फिल्म के जरिए समाज में जागरूकता लाने के नए कीर्तिमान गढ़े हैं। ‘दुख होता है यह जानकर कि देश की 82 फीसदी महिलाएं सैनिटरी पैड का इस्तेमाल नहीं करतीं। सैनिटरी पैड से जीएसटी हटाने से अच्छा है कि इन्हें ग्रामीण और दूरदराज इलाकों की महिलाओं को मुफ्त मुहैया कराया जाए।’

 
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फिल्म मे राधिका का एक डायलॉग है- ‘आदमी दर्द में तो जी सकता है लेकिन शर्म में नहीं जी सकता’। राधिका आप्टे ने कहा, वह एक मां ही होती है, जो अपनी बेटी की पहली माहवारी पर उसे परिवार के अन्य सदस्यों से छिपाकर सैनिटरी पैड देती है। उसे मंदिर में जाने नहीं दिया जाता। रसोई में घुसने की मनाही होती है। समाज के कई तबकों में तो माहवारी के समय महिलाओं के बर्तन और बिस्तर तक अलग कर दिए जाते हैं, उनके साथ अछूतों जैसा व्यवहार होता है। पैडमैन इसी शर्म के चोले को उतार फेंकने के लिए बनी है।’
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