भंसाली आगे कहते हैं, 'फिल्म उस स्टोरी पर बेस्ड है जिसमें किरदार जौहर करते हैं। वह ये करते हैं क्योंकि उस वक्त ये उनके लिए जंग का ही एक हिस्सा था। मुझे लगता है कि यह एक सशक्त सोच है। उन्होंने दुश्मन को जीतने नहीं दिया। वह जीत सम्मान की थी। मैं इसके लिए उनके सम्मुख सवाल खड़ा नहीं कर सकता था। यह वही चीज है जैसा सवाल यह है कि ताजमहल इतना खर्च कर के क्यों बनाया गया इससे चैरेटी की जा सकती थी। कुछ लोग इस बात के पक्ष में होंगे तो कुछ इसका विरोध करेंगे। बस ये वैसा ही है। तो सब कुछ ठीक है।'