bollywood
- फोटो : self
फ़ीफ़ी शब्द की वजह बैन हुए ओपी
पचास के दशक में ऑल इंडिया रेडियो ने उनके कुछ गानों पर प्रतिबंध लगा दिया. उनकी नज़र में वो कुछ ज़्यादा ही आधुनिक थे. ये अलग बात है कि रेडियो सीलोन पर वो गाने इतने लोकप्रिय हुए कि उन्होंने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए.
सिराज ख़ाँ बताते हैं, "सीआईडी फ़िल्म में उन्होंने एक गाना बनाया था जाता कहाँ है दीवाने. उसमें एक शब्द था फ़ीफ़ी, जिसे एआईआर वालों ने समझा कि इसका कोई द्विअर्थी मतलब है. इसलिए उसे बैन कर दिया गया. लेकिन ये गाना बहुत लोकप्रिय हुआ और इसे पिछले दिनों प्रदर्शित हुई फ़िल्म बॉम्बे वेलवेट में दोबारा इस्तेमाल किया गया."
आशा भोसले को आशा भोसले बनाने का श्रेय अगर किसी को दिया जा सकता है तो वो थे ओ पी नैयर. उन्होंने आशा की आवाज़ के वैविध्य और रेंज का पूरा फ़ायदा उठाया. उनके रूमानी संबंधों ने भी उनके गानों में एक ख़ास किस्म की चिंगारी भर दी.
सिराज ख़ाँ कहते हैं, "मेरा ख़्याल है इस तरह का रिश्ता बॉलीवुड क्या हॉलीवुड में भी नहीं हुआ है. उनकी प्रोफ़ेशनल रिलेशनशिप रोमांस में बदल गई और 1958 से लेकर 1972 तक यानी 14 सालों तक उनका साथ रहा. ये बहुत गहन साथ था. आप सोचिये एक शादीशुदा शख्स जिसके चार बच्चे हैं और एक तलाकशुदा महिला खुलेआम बंबई में घूमा करते थे.''
''नैयर साहब ने एक पत्रकार से कहा था, 'ये तो सुना था कि लंव इज़ ब्लाइंड, लेकिन मेरे मामले में लव ब्लाइंड के अलावा डेफ़ यानी बहरा भी था क्योंकि आशा की आवाज़ के अलावा मैं और कोई आवाज़ सुन नहीं पाता था. इसी वजह से उन्होंने शमशाद बेगम और गीता दत्त से किनाराकशी अख़ित्यार कर ली."