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शादी की दावत में मिला था ओम प्रकाश को फिल्मों का ऑफर, कभी कॉमेडियन तो कभी प्यारे दद्दू बनकर जीता फैंस का दिल

Sat, 19 Dec 2020 10:52 AM IST
विजयाश्री गौर एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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ओम प्रकाश - फोटो : Mumbai, Amar Ujala
बॉलीवुड की दुनिया चमचमाते सितारों से हमेशा भरी रही है और इस इंडस्ट्री ने लोगों को ऐसे ऐसे कलाकार दिए हैं जिन्होंने अभिनय के स्तर को हमेशा ऊंचा रखा। वैसे तो हिंदी सिनेमा में एक से बढ़कर एक सितारे हैं, लेकिन गुजरे जमाने के कुछ सितारे ऐसे भी थे जिन्होंने आने वाली पीढ़ी को अभिनय का पाठ पढाया था। जी हां, हम बात कर रहे हैं एक्टर ओम प्रकाश की, जिन्होंने 60-70 के दशक में एक से बढ़कर एक फिल्में कीं और अपनी प्रतिभा से हर किसी के दिल पर राज किया। आज उनके जन्मदिन के मौके पर आपको बताते हैं उनसे जुड़ी खास बातें।
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ओम प्रकाश - फोटो : Social Media
ओम प्रकाश का जन्म 19 दिसंबर 1919 को जम्मू में हुआ था। जब वो 12 साल के थे तो क्लासिकल संगीत सीखना शुरू कर दिया। बचपन से ही थिएटर और फिल्मों में उनकी दिलचस्पी थी। महज 14 साल की उम्र में एक्टिंग करने के लिए मुंबई पहुंच गए लेकिन बात नहीं बनी तो उन्हें वापस लौटना पड़ा। हालांकि जम्मू आकर उनका मन नहीं लगा तो कुछ सालों बात उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो में काम करना शुरू कर दिया। वहां उन्हें तन्ख्वाह बेहद ही कम मिल रही थी तो उन्होंने वहां से भी इस्तीफा दे दिया।
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ओम प्रकाश - फोटो : social media
वो प्रयास करते जा रहे थे और एक दिन किस्मत ने उनका पता ढूंढा लिया। ओम प्रकाश अपने दोस्त की शादी में पहुंचे थे। वहां वो हंसी-मजाक कर रहे थे कि प्रोड्यूसर दलसुख पंचोली की नजर उन पर पड़ गई। शादी के बाद ओम प्रकाश अपने घर चले गए और कुछ समय बाद उन्हें एक टेलीग्राम मिला जिस पर लिखा था- तुरंत आओ- पंचोली। उस वक्त तो ओम प्रकाश ने इसे मजाक समझा लेकिन दोस्तों और भाई के समझाने पर मिलने चले गए।

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ओम प्रकाश - फोटो : social media
ये दलसुख पंचोली का ओम प्रकाश के लिए खत नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा का अपने कलाकार के लिए एक बुलावा था। ओम प्रकाश को 1944 में पहली फिल्म मिली दासी, जिसमें उनका रोल एक कॉमिक विलेन का था। फिल्म सुपरहिट हुई, लेकिन इसके बाद उन्हें लंबे समय तक काम नहीं मिला। दोबारा उन्हें काम मिला फिल्म धमकी में और इस फिल्म के हिट होते ही ओम प्रकाश भी हिट हो गए। इसके बाद 1973 की फिल्म जंजीर फिल्म में डीसिल्वा का किरदार निभाया और 1984 की फिल्म शराबी में मुनीम जी के रोल में वो हर किसी के दिलों में बस गए।
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ओम प्रकाश
ओम प्रकाश ने फिल्मों में हंसाया भी और हंसाते हंसाते रुलाया भी। फिल्म चुपके चुपके में उनके गुस्से वाले जीजाजी का किरदार आज भी लोगों को हंसा जाता है तो वहीं नमक हलाल में बड़े दिल वाले दद्दू में हर किसी को अपने दादा दिखने लगते हैं। ओम प्रकाश ने इन फिल्मों के अलावा खानदान, अन्नदाता, बुड्ढा मिल गया, लोफर और पतंग जैसी फिल्मों में काम कर अपने हुनर का लोहा मनवाया।
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ओम प्रकाश - फोटो : social media
ओम प्रकाश ने अपने निजी जीवन में अमीरी, गरीबी, संघर्ष, आर्थिक तंगी, परेशानी और कामयाबी सब देखी थी। शायद ये ही वजह थी की पर्दे पर किसी भी किस्म का किरदार निभाना उनके लिए कभी मुश्किल नहीं रहा। वो बेहद ही जिंदादिल इंसान थे। उन्होंने 50 साल तक फिल्म इंडस्ट्री में काम किया और फिर वो बीमार रहने लगे। 21 फरवरी 1998 को दिल का दौरा आने के चलते उनका निधन हो गया और हिदी सिनेमा का एक बेहतरीन सितारा एक दूसरी दुनिया में खो गया। ओम प्रकाश चले जरूर गए लेकिन उन्हें उनके अभिनय और जिंदादिली के लिए हमेशा याद रखा जाएगा।
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