नुसरत फतेह अली खान
- फोटो : सोशल मीडिया
नुसरत के पिता फतेह अली खान, चाचा सलामत अली खान और मुबारक अली खान भी एक कव्वाल थे। खान साहेब का यह खानदानी पेशा था। यही कारण रहा कि फतेह अली खान, बचपन से ही नुसरत और उनके भाई फारुक को हारमोनियम बजाना, गाना और इससे जुड़ी दूसरी तालीम देते रहे। लड़कपन में बच्चों का मन इसमें नहीं रमता था, बावजूद इसके भी उन्हें तालीम लेनी पड़ती थी। वहीं, एक इंटरव्यू में नुसरत के भाई फारुक फतेह अली खान ने साझा किया था, 'दोनों भाइयों को टॉफी का लालच लेकर धोबीघाट के पास ले जाते थे। वहां पर बैठकर ही राग, हारमोनियम और अन्य जानकारी दी गई। ये सिलसिला लंबे वक्त चलता रहा, लेकिन किसी का भी गाने में मन नहीं लगा।'