13 अक्टूबर 1948 को कव्वालों के घराने में जन्मे नुसरत फतेह अली खान की आवाज के अनूठेपन और रूहानियत को चाहकर भी भुलाया नहीं जा सकता है। नुसरत साहब अपनी अलग आवाज के साथ-साथ अपनी गायकी के अंदाज के लिए भी जाने जाते थे। नुसरत फतेह अली खान की आवाज और शब्दों का जादू कुछ ऐसा है जो एक बार सुन ले वो बस उन्हीं का हो जाता है। ऐसे में 'मेरे रश्के कमर...', से 'ये जो हल्का हल्का सुरूर है...' तक हम आपके लिेए लाए है उनके कुछ सदाबहार गाने।