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'आफरीन आफरीन' से लेकर 'मेरे रश्के कमर' तक, संगीत से इश्क करा देंगे नुसरत फतेह अली खान के ये 5 गाने

Sat, 12 Oct 2019 06:58 PM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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नुसरत फतेह अली खान - फोटो : Social Media
13 अक्टूबर 1948 को कव्वालों के घराने में जन्मे नुसरत फतेह अली खान की आवाज के अनूठेपन और रूहानियत को चाहकर भी भुलाया नहीं जा सकता है। नुसरत साहब अपनी अलग आवाज के साथ-साथ अपनी गायकी के अंदाज के लिए भी जाने जाते थे। नुसरत फतेह अली खान की आवाज और शब्दों का जादू कुछ ऐसा है जो एक बार सुन ले वो बस उन्हीं का हो जाता है। ऐसे में 'मेरे रश्के कमर...', से 'ये जो हल्का हल्का सुरूर है...' तक हम आपके लिेए लाए है उनके कुछ सदाबहार गाने।
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ये जो हल्का-हल्का सुरूर है....
आज भी नुसरत फतेह अली खान की आवाज कानों में पड़ती हैं, तो बहुत से लोग मंत्रमुग्ध होकर उनकी गायकी में खो जाते हैं। 
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'पिया रे-पिया रे...' 
'पिया रे-पिया रे...' से तो वो हर तरफ छा गए। आज नुसरत फतेह अली खान के चाहने वालों की कोई कमी नहीं क्योंकि जब ये लम्बी तान ले कर गाते थे तो दुनिया ठहर जाती थी।

'मेरे रश्के कमर...'
ये गाना आज भी किसी की जुबान से उतरने का नाम ही नहीं लेता लेकिन कम ही लोगो को पता होगा कि सबसे पहले ये गाना उस्ताद नुसरत फतेह अली खान ने गाया था। 
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मैंने पत्थर से जिनको बनाया सनम....
नुसरत उन बहुत कम लोगो में से है जिन्हें जीते जी इतनी मोहब्बत नहीं मिली जितनी जिंदगी से रुखसती के बाद मिली। 
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'आफरीन आफरीन'
नुसरत फतेह अली खान को जब बॉलीवुड में फिल्म का न्योता मिला तो उन्होंने शायर जावेद अख़्तर के साथ 'आफरीन आफरीन' गाया। से 'संगम' का सबसे हिट गीत था।

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