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इंडस्ट्री में एक्ट्रेस को लेकर बड़ा फैसला, अगर फिल्म में होंगे ऐसे सीन तो दिखाना होगा खास मैसेज

Tue, 01 May 2018 10:08 AM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
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Malayalam films scene
भारतीय फिल्म जगत की जब-जब बात होगी तो रिजनल सिनेमा का जिक्र भी हमेशा साथ में किया जाएगा। दरअसल, भारतीय फिल्म जगत की पटकथा लिखने में रिजनल सिनेमा का बहुत बड़ा योगदान रहा है, मगर बदलते दौर में रिजनल सिनेमा में भी काफी बदलाव देखे गए हैं। महिलाओं को लेकर फिल्मों में ऐसे सीन दिखाए जाने लगे हैं जिन पर समाज के नजरिए से सवाल उठना तय था। ऐसा ही कुछ मलयालम सिनेमा के साथ हुआ है। 
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Malayalam films scene
इसलिए आज हम मलयालम सिनेमा पर फोकस होकर बात करेंगे। दरअसल, हुआ यूं कि मलयालम फिल्मों में महिलाओं को लेकर हिंसक दृश्य दिखाए जाने के संबंध में वैधानिक चेतावनी भी साथ में दिखाने जाने के लिए कहा गया है। द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के मुताबिक  इस बाबत केरल स्टेट ह्यूमन राइट कमीशन ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) को निर्देश जारी की है। इस चेतावनी के जारी होने के बाद से माना जा रहा है कि मलयालम फिल्मों में या तो महिलाओं के खिलाफ अपराधिक दृश्य नहीं दिखाए जाएंगे और अगर ऐसे सीन दिखाए जाएंगे तो साथ में चेतावनी भी दिखानी होगी।
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Malayalam films scene
गुरुवार को जारी अपने आदेश में आयोग ने कहा कि स्क्रीन पर हिंसक यौन अपराध दिखाने से युवा प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में उम्मीद है कि वैधानिक चेतावनी प्रदर्शित करने से सकारात्मक प्रभाव हो सकता है। सीबीएफसी के क्षेत्रीय अधिकारी प्रतिभा ने बताया कि बोर्ड आयोग के निर्देश का अनुपालन करने के लिए खुला है। हमने सीबीएफसी अध्यक्ष को निर्देश के बारे में सूचित कर दिया है। 30 दिनों के भीतर इस पर निर्णय लेने की उम्मीद है। हालांकि प्रतिभा ने ये भी कहा कि हमारे पास इस बारे में स्पष्ट तस्वीर नहीं है कि इसे कैसे कार्यान्वित किया जाए।

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human rights commission
बेशक, सभी फिल्मों में ऐसे दृश्य नहीं होंगे, इसलिए यह सभी फिल्मों पर लागू भी नहीं हो सकता। तो अब से महिलाओं के खिलाफ फिल्मों में बगैर चेतावनी जारी किए न तो महिलाओं के खिलाफ हिंसक व अपराधिक सीन दिखाए जाएंगे और न किसी को महिला पर अश्लील कमेंट करते हुए कोई दृश्य दिखाया जाएगा। मौखिक उत्पीड़न और इसी तरह के मुद्दों को महिलाओं के खिलाफ अपराध की श्रेणी में माना जाता है। लेकिन फिल्म मेकर्स के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) की ओर से प्रतिभा कहती हैं कि बोर्ड कैसे परिभाषित करेगा कि किस तरह के दृश्य पर चेतावनी प्रदर्शित की जाएगी। प्रतिभा ने यह भी कहा कि बोर्ड ने अभी तक इस फैसले पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
 
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CBFC
विशेषज्ञों की राय
कोच्चि स्थित फिल्म समीक्षक और आलोचक मनीष नारायणन ने वैधानिक चेतावनी दिखाए जाने को लेकर कहा फिल्म के दौरान चेतावनी दिखाने से किसी भी तरह की जागरूकता नहीं फैल पाएगी। यह ठीक वैसे है जैसे एक सिगरेट बॉक्स पर धूम्रपान हानिकारक  होने की चेतावनी लिखी जाती है और फिर भी लोग उसे जानते हुए भी पीते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उल्टा ऐसे उपशीर्षक किसी भी व्यक्ति को ऐसे सीन देखने के लिए और भी ज्यादा प्रभावित करते हैं। दरअसल, किसी भी प्रकार की चेतावनी हमारे देखने के नजरिए को विचलित करती है। ऐसे में महत्वपूर्ण है कि हमारे लेखकों और कलाकारों को और अधिक सचेत होना चाहिए। 
 
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