फिल्म नोटबुक से लॉन्च हुई प्रनूतन की दादी नूतन समर्थ बहल, जिन्हें पूरा देश नूतन के नाम से जानता है, सिनेमा जगत की सबसे जानी मानी और उम्दा अदाकारा रही हैं। 5 बार फिल्मफेयर और पद्मश्री जीतने वाली यह अदाकारा अपनी बहुमुखी अभिनय के लिए काफी लोकप्रिय थीं।
उनके कई अपरंपरागत किरदारों ने उन्हें उस समय की सबसे उम्दा महिला अदाकारा के नाम से मशहूर कर दिया। 21 फरवरी 1991 में उनका ब्रेस्ट कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी के चलते निधन हो गया था। देखिए उनके 9 सबसे उम्दा किरदार जिन्होंने उन्हें हिन्दी सिनेमा की बेहतरीन अदाकारा बनाया और जिन्हें देखकर उनकी पोती प्रनूतन ने सीखी ऐक्टिंग।
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Nutan
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सीमा (1955)
किरदार - गौरी
इस फिल्म से नूतन ने सिनेमा जगत में कदम रखा था, इस फिल्म में उन्होने एक अनाथ लड़की का किरदार निभाया था, जिसके माता पिता का निधन हो जाने के बाद वह अपने चाचा के साथ रहने चली जाती है। जहां उस घर और बाहर काम करना पड़ता है। पर एक दिन झूठें चोरी के इलज़ाम में उसे जेल भेज दिया जाता है। फिर किस तरह वह सभी कठिनायों से बाहर निकल जाती है, इसपर कहानी आधारित है। फिल्म में उनके अलावा मशहूर कलाकार बलराज साहनी भी थे और इसे डायरेक्ट अमिय चक्रवर्ती ने किया था।
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सोने की चिड़िया (1958)
किरदार-लक्ष्मी
इस फिल्म को डायरेक्ट शाहिद लतीफ ने किया था, और इस फिल्म में भी उन्होने एक अनाथ का किरादार निभाया था, जिसका नाम लक्ष्मी है। इस फिल्म में भी उनका परिवार उनसे घर के काम कराया करता था। पर बात वहां बदल गई जब एक बार गलती से वह एक प्ले के बीच में पहुंच जाती हैं, और वहां उनसे गाना गवाया जाता है, फिर देखते ही देखते वह एक मशहूर कलाकार बन जाती हैं। फिल्म में उनके अलावा बलराज साहनी, चंदा और तलत महमूद भी थे।
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सुजाता (1959)
किरदार - सुजाता
इस फिल्म में उन्होंने फिर से एक अनाथ का किरदार निभाया था, जो निचली जाती से होती है, और उसे एक ब्राह्मण परिवार सहारा देता है। फिल्म में निचली जाती और ऊंची जाती के बीच अंतर को खत्म करने की पहल की थी। फिल्म को डायरेक्टर बिमल रॉय ने किया था, और इनके अलावा फिल्म में सुनील दत्त, ललिता पवार, शशिकला, सुलोचना लाटकर
भी थे।
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अनाड़ी (1959)
किरदार -आरती सोहनलाल
फिल्म में नूतन आरती का किरदार निभा रही हैं, जो एक अमीर आदमी की बेटी हैं, और उसे उनके नौकर राज कुमार (राज कपूर) से प्यार हो जाता है। राज कुमार किसी झूठें केस के सिलसिले में फस जाता है, पर आखिर में सच्चाई जानने के बाद उसे रिहा कर दिया जाता है। फिल्म को डायरेक्टर ऋषिकेश मुखर्जी ने किया था। दर्शकों को राज कपूर और नूतन का यह ऑन स्क्रीन कपल बहुत पसंद आया था।
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छलिया (1960)
किरादर - शांति
फिल्म की कहानी शांति के इर्द-गिर्द ही घूमती है, जहां शांति की शादी भारत की आज़ादी के वक्त होती है, पर बंटवारे के वक्त उसका परिवार भारत आ जाता है, और शांती पाकिस्तान में ही रह जाती है। जिसके बाद किसी तरह वह वापिस अपने परिवार के पास आ जाती है, और उसका पति उस पर विश्वास नहीं करता है। पर फिल्म की कहानी में आखिर तक सभी कुछ सही हो जाता है। इस फिल्म के निर्माता मनमोहन देसाई थे, और इस फिल्म फिर एक बार राज कपूर और नूतन एक साथ नज़र आए थे।
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तेरे घर के सामने (1963)
किरदार - सुलेखा
साल के पहले दिन रिलीज़ हुई यह फिल्म बहुत बड़ी हिट रही और उस साल की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी। फिल्म को प्रोड्यूस देवा आनंद ने किया और डायरेक्ट उनके भाई विजय आनंद ने किया था। इसके साथ-साथ फिल्म में मुख्य किरादर की भूमिका भी देवा आनंद निभा रहे थे। फिल्म में नूतन और देव आनंद दो अमीर परिवार से हैं जिनके बीच मे दुश्मनी होती है, और नूतन व देव दोनों एक दूसरे के प्यार में पड़ जात हैं, जिसके चलते दोनों परिवारों के बीच जल्द ही दुश्मनी खत्म हो जाती है।
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दिल ही तो है (1963)
किरदार - जमीला बानो
इस फिल्म में फिर एक बार राज कपूर और नूतन का दर्शकों का चहेता ऑन स्क्रीन कपल नज़र आया था। फिल्म में नूतन और राज दोनों ही मुसलिम परिवार से हैं। राज का किरदार ऐसे पति का होता है जिसकी पत्नी की मौत हो जाती है। फिर नूतन और राज के बीच प्यार हो जाता है। इस फिल्म को डायरेक्टर सीएल रावल और पीएल संतोशी ने एक साथ मिलकर किया था।
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बंदिनी (1963)
किरदार - कल्याणी
देखा जाए तो यह उन दिनों की पहली महिला केंद्रित फिल्म थी, और इसकी कहानी बंगाली उपन्यास तमासी पर आधारित थी। जिसमे नूतन एक कैदी का किरदार निभा रही हैं, जिसको अपने प्यार के लिए डॉक्टर या फिर अपने पूर्व प्यार को चुनना होता है। फिल्म कता निर्देशन मशहूर डायरेक्टर बिमल रॉय ने किया था, और फिल्म में नूतन के अलावा धर्मेंद और अशोक कुमार भी मुख्य भूमिकाओं में नज़र आए थे। इस फिल्म के लिए नूतन को बेस्ट एक्ट्रेस का खिताब भी मिला था।
मिलन (1967)
किरादर - राधा, राधा देवी
इस फिल्म से पहली बार हिन्दी सिनेमा में पुनर्जन्म की कहानी को दर्शाया गया था। फिल्म की कहानी में दो प्रेमी जो किसी मुश्किल के कारण एक दूसरे के नहीं हो पाते, दूसरे जन्म में एक दूसरे के हो ही जाते हैं। दरअसल यह फिल्म तेलेगू फिल्म मूगा मणासुलु का हिन्दी रीमेक थी। फिल्म में नूतन के सात सुनील दत्त मुख्य भूमिका निभा रहे थे, और इसे डायरेक्टर अदूर्थी सुब्बा राव ने किया था।