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इन 5 किरदारों के लिए बरसी पर लोगों को बहुत याद आए निर्मल पांडे, कोई दूसरा न कर पाएगा ये काम

Tue, 18 Feb 2020 06:58 PM IST
anand anand अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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Nirmal Pandey - फोटो : social media
अभिनेता निर्मल पांडे उन चुनिंदा कलाकारों में एक हैं जिन्होंने फिल्मों से लेकर टीवी की दुनिया में भी नाम कमाया। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से निर्मल ने अदाकारी की जो तालीम हासिल की उससे उन्होंने इंडस्ट्री में अपने अभिनय का लोहा मनवाया। 10 अगस्त 1962 को नैनीताल, उत्तराखंड में जन्मे निर्मल ने करीब 20 साल फिल्मों में काम किया। 18 फरवरी 2010 को 48 वर्ष की आयु में ही उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनकी पुण्यतिथि के मौके पर हम आपको उनके 5 बेहतरीन किरदारों से वाकिफ कराने जा रहे हैं।
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Nirmal Pandey - फोटो : amar ujala mumbai
बैंडिट क्वीन (1994)
निर्मल पांडे को फिल्म 'बैंडिट क्वीन' में निभाए उनके किरदार विक्रम मल्लाह के लिए आज भी याद किया जाता है। यह फिल्म फूलन देवी के जीवन पर आधारित है जिसका निर्देशन शेखर कपूर ने किया था। इस फिल्म ने देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी अपनी धाक जमाई थी। आज भी इस फिल्म को अपने बेहतरीन अभिनय, निर्देशन और कहानी के लिए याद किया जाता है। फिल्म में निर्मल ने एक डाकू सरगना का किरदार निभाया है। उन्होंने अपने अभिनय से फिल्म की नायिका के सामने दमदार मौजूदगी दर्ज कराई थी।
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Nirmal Pandey - फोटो : amar ujala mumbai
हातिम (2003-2004)
निर्मल लगातार फिल्मों और टीवी शोज में सक्रिय रहे। उन्होंने फिल्म अभिनेता बनने के बावजूद कभी टीवी से अपनी दूरी नहीं बनाई। उनके निभाए सभी किरदारों में एक किरदार टीवी शो हातिम में दज्जाल का भी है। यह एक नकारात्मक किरदार था जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। इस शो के करीब 47 एपिसोड प्रसारित हुए थे। इस दौरान लोग जितना हातिम को देखना पसंद करते थे उतना ही दज्जाल को लेकर भी क्रेज रहता था।

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Nirmal Pandey - फोटो : amar ujala mumbai
दायरा  (1996)
अमोल पालेकर निर्देशित इस फिल्म में निर्मल पांडे और सोनाली कुलकर्णी मुख्य किरदार में दिखे। यह फिल्म अपने विषय के कारण भारत में कभी रिलीज नहीं हो पाई। हालांकि इस फिल्म को दूसरे देशों और फिल्म महोत्सवों में काफी वाह-वाही मिली। फिल्म में निर्मल ने एक ट्रांसवेस्टीट (विषुपहिरणी) का किरदार अदा किया है। इस चुनौतीपूर्ण किरदार ने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा। इस फिल्म में एक गांव की लड़की की मजबूरी को दिखाया गया है जो एक लड़का बनने पर मजबूर होती है। इस फिल्म के जरिए समाज की मानसिकता पर चोट की गई है। फिल्म का कहानी, निर्देशन, अभिनय और संगीत से लेकर सभी पक्ष काफी मजबूत और प्रभावी रहे।
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Nirmal Pandey - फोटो : amar ujala mumbai
ट्रेन टू पाकिस्तान (1998)
विभाजन के इर्द-गिर्द घूमती यह फिल्म खुशवंत सिंह की नॉवेल पर आधारित है। पामेला रुक्स निर्देशित इस फिल्म में निर्मल पांडे ने जगत सिंह/जग्गा का किरदार निभाया है। वह एक डकेत होता है जो एक मुस्लिम लड़की नूरन (स्मृति मिश्रा) से प्यार करता है। फिल्म में एक ऐसे गांव की कहानी दिखाई जाती है जो सरहद के पास है। गांव में सिख और मुस्लिम लोग रहते हैं। बंटवारे के दौरान एक ट्रेन पाकिस्तान से भारत आती है जिसमें लोगों की लाशें होती हैं, जिसके बाद से वहां का पूरा माहौल बदल जाता है। खुशवंत सिंह की इस किताब पर फिल्म बनाने की कोशिश कई कलाकारों ने पहले भी की थी लेकिन इस विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए किसी ने इसपर फिल्म नहीं बनाई।
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Nirmal Pandey - फोटो : amar ujala mumbai
लाहौर (2010)
इस फिल्म के प्रीमियर से ठीक पहले निर्मल पांडे दुनिया को अलविदा कह गए थे। यह एक स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म है। जिसमें निर्मल ने अनवर शेख नामक एक दयालु पाकिस्तानी व्यक्ति का किरदार अदा किया था। वैसे तो यह फिल्म का मुख्य किरदार नहीं था लेकिन प्रभावी जरूर था। बताया जाता है कि 22 फरवरी 2010 को इस फिल्म का प्रीमियर था और इससे सिर्फ चार दिन पहले 18 फरवरी को उनकी मृत्यु हो गई। 
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