राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता निर्देशक नील माधब पांडा की पहली उड़िया फिल्म 'कलीरा अतीता' 16वीं सदी के एक संत अच्युतानंद की भविष्यवाणी पर आधारित है। अच्युतानंद की भविष्यवाणी कहती है कि बंगाल की खाड़ी में अगर ग्लोबल वार्मिंग के चलते इसी तरह जलस्तर बढ़ता गया तो बहुत ही जल्द समुद्र का पानी उड़ीसा के पुरी शहर को डुबा देगा। यह बात उन्होंने अपनी मशहूर किताब 'अच्युतानंद मालिका' में भी लिखी है।
फिल्म 'कलीरा अतीता' के निर्देशक नील माधब को इस बात की बहुत खुशी है कि उनकी फिल्म इफ्फी के पैनोरमा सेक्शन में प्रदर्शित होने के लिए चुनी गई है। अपनी खुशी जाहिर करते हुए नील ने कहा, 'कलीरा अतीता मेरी पहली उड़िया फिल्म है और मैं बहुत खुश हूं कि इस फिल्म की यात्रा की शुरुआत प्रतिष्ठित इफ्फी समारोह से हो रही है। यह वास्तव में इस साल की सबसे अच्छी खबरों में से एक है और मुझे आशा है कि आने वाला साल भी खुशियां लेकर आएगा।'
नील माधब को सामाजिक मुद्दों, पर्यावरण संरक्षण, बाल मजदूरी, शिक्षा, पानी की समस्या, आदि कल्याणकारी विषयों पर फिल्में बनने के लिए जाना जाता है। 'आई एम कलाम', 'जलपरी', 'कौन कितने पानी में', 'कड़वी हवा', 'हल्का' जैसी फिल्में उन्होंने ही बनाई हैं। 'कलीरा अतीता' को बनाने का कारण भी उन्होंने बताया है कि भविष्य इससे भी अछूता नहीं रहेगा। नील माधब ने कहा, 'यह फिल्म एक कड़वी सच्चाई की ओर इशारा करती है कि जलवायु परिवर्तन ने लोग वास्तव में अपना जीवन खो रहे हैं।'