निकिता घाग
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वह कहती हैं, ‘फिल्म ‘आनंदी’ भारतीय कथाओं को परदे पर लाने की मेरी पहली कोशिश हैं और मेरा मानना है कि ऐसी और भी कहानियां भारतीय लेखकों के पास हैं, जिन पर काम किया जा सकता है। ऐसे किसी भी प्रस्ताव पर विचार के लिए मैं आगे भी तैयार रहूंगी।’ पारलौकिक विषयों को लेकर अपनी खास रुचि के बारे में भी निकिता खुलकर बात करती हैं। वह कहती हैं, ‘भारतीय भाषाओं में बनने वाली फिल्मों में हॉरर पर अब भी बहुत ही कम काम हुआ है। हिंदी सिनेमा में हॉरर फिल्मों को देखने वालों की बहुत बड़ी तादाद रही है। ये जानकारी ही मन खुश कर देने वाली रही है कि ‘स्पेशल 26’, ‘ए वेडनसडे’ और ‘एम एस धोनी द अनटोल्ड स्टोरी’ जैसी कमाल की फिल्में बनाने वाले निर्माता, निर्देशक नीरज पांडे इस दिशा में गंभीरता से काम शुरू कर चुके हैं। दादी और नानी की कहानियों में अधिकतर कहानियां ऐसी ही होती हैं, जिन्हें सुनते हुए डर भी लगता है लेकिन फिर भी उन्हें सुनने का मन करता है।’