Neena Gupta
बीबीसी से खास बातचीत में नीना गुप्ता ने कहा, "मेरी बेबाक़ी ने मुझे तबाह कर दिया। हमारे यहां जैसा व्यक्तित्व होता है वैसे ही किरदार मिलते है। प्रबल महिला होने के कारण मुझे नकारात्मक किरदार ही मिले। मेरी पहली कमर्शियल फ़िल्म "साथ-साथ" में मैंने चश्मा पहनने वाली एक चुलबुली लड़की का किरदार निभाया था। दर्शकों को ये किरदार खासा पसंद आया, लेकिन गिरीश कर्नाड ने उस समय मुझसे कहा था कि अब मुझे कोई अभिनेत्री का किरदार नहीं देगा और वही हुआ। "चोली के पीछे" गाने के बाद भी मुझे ऐसी ही गाने मिलते रहे। नीना गुप्ता ने बतौर अभिनेत्री अपने आप को साबित करने के लिए टीवी का रुख किया, लेकिन उससे उनके फिल्मी करियर को कोई फायदा नहीं हुआ। वो कहती हैं कि टीवी ने उन्हें बचाया अगर उस दौरान वो टीवी नहीं करतीं तो उन्हें वापस जाना पड़ता पर उन्हें खुशी है कि टीवी के उस सुनहरे वक्त की वो हिस्सा रही और "कमज़ोर कड़ी कौन", यात्रा", "दाने अनार के", "सांस" जैसे धारावाहिक में काम किया।