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पूर्व मिस इंडिया ने खोली नवाजुद्दीन और पत्नी के संबंधों की पोल, यौन शोषण का भी लगा चुकी हैं आरोप

Thu, 15 Nov 2018 11:52 AM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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Nawazuddin Siddiqui - फोटो : social media
इस हफ्ते नवाजुद्दीन सिद्दीकी की रुकी हुई फिल्म धूमकेतु रिलीज होनी थी। परंतु मीटू मूवमेंट को हैशटैग करते हुए पूर्व मिस इंडिया अभिनेत्री निहारिका सिंह ने नवाज के बारे में ऐसी बातें खोल दीं कि निर्माताओं ने फिल्म रोक ली। नवाज की साधारण इंसान और बेहतरीन कलाकार वाली छवि पिछले कुछ समय में संकटग्रस्त हुई है। क्या 2019 में उनकी आने वाली ठाकरे इससे प्रभावित हुए बिना रहेगी।
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Nawazuddin Siddiqui
किक, बदलापुर और बजरंगी भाईजान के साथ नवाजुद्दीन सिद्दिकी ने स्टारडम की जो सीढ़ियां चढ़ीं उसमें उनकी बेजोड़ अभिनय प्रतिभा के साथ लोगों की सद्भवनाओं ने भी बड़ा योगदान दिया। बॉलीवुड में उनके संघर्ष की कहानियां हर तरफ छप रही थीं। रंगीन चिकने पन्नों वाली देसी-विदेशी अंग्रेजी पत्रिकाओं में तक उनके चेहरे कद काठी और रंग को लेकर बातें थीं। हर कोई कह रहा था कि उन्होंने बॉलीवुड में सफलता के लिए जरूरी गोरे-चिट्टेपन, अच्छी हाइट-हेल्थ के पैमानों को मेहनत और प्रतिभा से छिन्न-भिन्न कर दिया। वह अलग मिट्टी के बने हैं। 
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nawazuddin siddiqui
हिंदी पट्टी के दर्शक गर्व से भरे थे कि गैर अंग्रेजी माहौल और किसान परिवार का लड़का बॉलीवुड सितारों को न केवल टक्कर दे रहा है बल्कि अपने तेज-तर्रार धारदार अभिनय से उनकी छुट्टी कर रहा है। इन बातों के बीच नवाज की तेजी से अंतरराष्ट्रीय पहचान भी बनी। मिस लवली और लंच बॉक्स के नतीजे रंग लाए। मगर बीते एक-डेढ़ साल में अचानक नवाजुद्दीन की सकारात्मक छवि पर संकट के बादल छाने लगे। 

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nawazuddin siddiqui
कुछ खुद उनके बदले बर्ताव से और कुछ उन पर महिलाओं द्वारा लगाए आरोपों के कारण। उनकी दंतकथा सी लगती सफलता की कहानी में दाग लग गए। उधर नवाज को भी लगने लगा कि हिंदी समाज दर्शक और मीडिया उन्हें समझ नहीं पा रहे लेकिन सच यह है कि नवाज के आत्मकथा प्रकरण और हाल में अभिनेत्री निहारिका सिंह द्वारा सोशल मीडिया में खोली गई बातों के बाद लगने लगा है कि ये वो नवाज तो नहीं। अचानक नवाज की परिश्रमी उत्तर भारतीय छवि संकटग्रस्त हो गई और वह उन आम बिगड़ैल बॉलीवुड सितारों जैसे लगने लगे, जो शोहरत की डाल पर इतराते हैं। शराब,सिगरेट,सुंदरी और अहंकार जिनके जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। 
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नवाजुद्दीन सिद्दीकी
नवाज करिअर के ऐसे दोराहे पर हैं जहां एक गलत कदम लंबे सफर को छोटा बना सकता है। बॉलीवुड का इतिहास अर्श-फर्श के हादसों से भरा पड़ा है। असल में शुरुआत खुद नवाज ने की। वह शायद लालच के उस फंदे में फंस गए जहां कहा गया कि फिल्मी सफलता को किताब में ढालकर भुना लिया जाए। उनकी आत्मकथा एन ऑर्डनरी लाइफ बाजार में आते ही तूफान उठा। उन्होंने कुछ पन्ने जीवन में आई महिलाओं के साथ अंतरंग प्रसंगों पर लिखे तो पता चला कि नवाज उतने साधारण नहीं हैं, जितने लगते हैं। इन महिलाओं ने पलटवार किया। महिला आयोग, पुलिस और अदालत तक मामला पहुंचा तो नवाज ने किताब वापस ले ली, जो कभी वापस बाजार में आएगी इसमें संदेह है।
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नवाजुद्दीन सिद्दीकी
मामला ठंडा पड़ चुका था कि बॉलीवुड में शुरू हुए मीटू अभियान में पूर्व मिस इंडिया निहारिका सिंह ने नवाज का अध्याय खोल दिया। उन्होंने नवाज के मन में किसी जमाने में रही रंग-रूप की असुरक्षाओं को दुनिया के सामने ला दिया। यह भी बताया कि कैसे नवाज एक सुबह उनके घर पहुंचे। उन्हें दबोच लिया तो कैसे अनिच्छा से इस सुंदरी को समर्पण करना पड़ा। निहारिका ने नवाज के पत्नी के साथ संबंधों के उतार-चढ़ाव के बारे में भी अपनी पोस्ट में लिखा, जबकि इस मुद्दे को नवाज ने हमेशा मीडिया की कल्पना बताया। 
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Nawazuddin Siddiqui
निहारिका ने ऐसी बातें लिखीं, जो नवाज की सीधे-सरल लक्ष्य पर नजर रख कर काम से काम रखने इंसान की छवि को खंडित करती हैं। संभव है कि नवाज की खंडित छवि का असर आने वाले दिनों में दिखे। जब उनकी फिल्में रिलीज  होगी। गौरतलब है कि उनकी सोलो फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर कभी कमाई नहीं की। वेब सीरीज सेक्रेड गेम्स भी महानगरों और विदेश में सराही गई।

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kubra sait and nawazuddin
नवाज आलोचना सुनना पसंद करते हैं बशर्ते आलोचक उस काबिल हो। वह कहते हैं कि जो इसांन किसी काबिल नहीं, वह किसी को भी गाली दे सकता है। जब कोई मेरी आलोचना करता है तो मैं उसकी शिक्षा के बारे में जानकारी हासिल करता हूं। वह मेरे जितना शिक्षित है या मेरे जितना अनुभव रखता है। यदि इंसान समझदार, जानकारी रखने वाला या अनुभवी है तो वह मुझे दस गाली दे सकता है। हर गाली स्वीकार करूंगा। विचार करूंगा। सीखूंगा क्योंकि वह काबिल है। काबिल इंसान की सुननी चाहिए। जो नालायक हैं, घर बैठे सोशल मीडिया पर शेखी बघारते हैं, उनको तवज्जो नहीं देता।

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nawazuddin
सलमान-शाहरुख स्टारर फिल्मों से नवाज बुद्धिजीवी सिनेप्रेमी वर्ग से निकलकर आम दर्शकों तक पहुंचे परंतु उनकी सोलो फिल्मों को टिकट खिड़की पर सफलता का इंतजार है। बजरंगी भाईजान के वक्त वह लोकप्रियता के शिखर पर थे। फिर तीन साल में उनकी दर्जन भर फिल्में आईं।
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नवाजुद्दीन सिद्दीकी
शाहरुख स्टारर रईस के औसत परफॉर्मेंस को छोड़ें तो नवाज की हर फिल्म फ्लॉप है। ये हैं 2015 में मांझी: द माउंटेनमैन, 2016 में तीन रमन रावघ 2.0, फ्रीकी अली, 2017 में हरामखोर, मॉम, मुन्ना माइकल, बाबूमोशाय बंदूकबाज, मानसून शूटआउट और इस बरस जीनियस और मंटो। साल 2019 में उनकी एक के बाद एक कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर दस्तक देंगी। जिनमें ठाकरे, मोतीचूर-चकनाचूर, फोबिया-2, द म्यूजिक टीचर हैं। अब देखना होगा कि ठाकरे जैसी बड़ी फिल्मों पर कहीं मी टू मूवमेंट का असर पड़ेगा ना पड़ जाए।
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