नवाजुद्दीन सिद्दीकी
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लेखन में बदलाव की जरूरत
हिंदी सिनेमा के लेखन में बदलाव की जरूरत का मैं भी समर्थक हूं। मेरा मानना है कि हाल के दिनों में फिल्मों को लिखने वाले किरदारों पर ध्यान कम दे रहे हैं। वे संवाद लिख रहे हैं, कहानी और पटकथा पर उनका ध्यान उतना नहीं है। लेखकों को किरदारों के अतीत, उनकी भाषा शैली, उनके हावभाव और उनकी शख्सीयत के कारकों पर ध्यान देना चाहिए। कोई किरदार कुछ कर रहा है तो क्यों कर रहा है, ये बहुत जरूरी है। जैसे ‘शोले’ में गब्बर का पहनावा, उसके चलने का ढंग, उसके नशा करने का तरीका, उसका अपना है। उसने ये सब क्यों अपनाया, उसके कारण हैं।