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बाला साहेब के रोल में मुझे देख क्या बोले उद्धव ठाकरे? नवाज ने खास इंटरव्यू में किए कई खुलासे

Wed, 27 Feb 2019 11:09 AM IST
shrilata biswas अक्षित त्यागी, अमर उजाला, मुंबई
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Nawazuddin Siddiqui, Thackeray - फोटो : amar ujala
बॉलीवुड एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी किसी रेस में नहीं हैं। धीरे-धीरे करके उन्होंने अपना एक अलग प्रशंसक वर्ग बना लिया है, जो उनकी फिल्में और वेबसीरीज खूब देखता है और उन्हें प्यार भी करता है। अमर उजाला ने नवाजुद्दीन से एक खास मुलाकात की। आगे की स्लाइड में देखिए उनसे बातचीत के मुख्य अंश।
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Nawazuddin Siddiqui - फोटो : file photo
यूपी के नवाजुद्दीन ने महाराष्ट्र के ठाकरे का किरदार बहुत बखूबी निभाया, इस किरदार को लेकर कोई ऐसी प्रतिक्रिया, जिसे आप अपने किरदार की जीत मानते हों?
मुझे महाराष्ट्र के लोगों से ही तारीफ मिली सबसे ज्यादा और जो करीब थे। उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे से बहुत तारीफें मिली हैं। बहुत सारी चीजें इन लोगों ने मुझे बताई भी थीं। इन लोगों ने फिल्म देखने के बाद कहा कि आपने सब कुछ हूबहू उनकी तरह ही किया है तो जब इन लोगों से इतनी तारीफ मिल गई तो किसी दूसरे की जरूरत क्या है। 
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manto - फोटो : file photo
मंटो, ठाकरे और अब फोटोग्राफ। एक किरदार से दूसरे किरदार में जाने की आपकी प्रक्रिया क्या रहती है?  क्या कभी किसी किरदार का हैंगओवर फिल्म की शूटिंग खत्म होने के बाद भी कायम रहा?
जी हां, अक्सर रहा है। मंटो के किरदार का हैंगओवर बहुत दिनों तक रहा लेकिन उसको खत्म करना पड़ता है क्योंकि आपको नया रोल करना पड़ता है। ठाकरे का किरदार भी फिल्म खत्म होने के बाद कई हफ्तों तक मेरे ऊपर रहा। जिस किरदार के अंदर आप घुस जाते हैं, उससे निकलने में थोड़ा सा वक्त लगता है।

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photograph - फोटो : social media
फोटोग्राफ के डायरेक्टर रितेश बत्रा कहते हैं कि रफी के किरदार के लिए उनकी आंखों के सामने आपका चेहरा ही तैरता रहा? क्या किसी कलाकार को किन्हीं खास किरदारों के लिए ही सोचा जाना ठीक लगता है आपको?
किसी भी निर्देशक की अपनी एक सोच होती है लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि जो भी निर्देशक मेरे बारे में सोचते हैं, बहुत अलग सोचते हैं। वह हमेशा एक अलग किरदार सोचते हैं और ये चैलेंजिंग होता है मेरे लिए। ये अलग सोच रखने वाले डायरेक्टर हैं और ये सोचते हैं कि यह किरदार बिल्कुल अलग है नवाज से लेकिन नवाज कर लेगा इसको। यह सब सुनकर एक कलाकार को अच्छा लगता है।
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Sacred Games - फोटो : file photo
सेक्रेड गेम्स का गणेश गायतोंडे जन्म से ब्राह्मण है लेकिन वह चौखाने वाली लुंगी भी पहनता है और गले में ताबीज जैसा भी कुछ बांधे रहता है, इस किरदार का ये गेटअप कहां से आया?
देखिए माहौल होता है एक। मुंबई में ऐसे लोगों के साथ गणेश गायतोंडे रहा जहां पर माहौल ऐसा होता है तो उसी माहौल के हिसाब से आपका पहनावा बदलता रहता है। 
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Photograph - फोटो : you tube
अप्रैल में आपको सिनेमा में आए 20 साल हो रहे हैं, कोई ऐसी बात शुरूआती दिनों की जो आपको अब भी मुंबई में किसी खास जगह से गुजरने पर याद आ जाती हो?
एक फोटोग्राफ है जो हमेशा याद आता है। अपने गांव बुढ़ाना में पहली बार मैंने मेले में पूरे परिवार के साथ फोटो खिंचवाईं थी। पूरे परिवार को बैठाकर, चांद और सितारे लगे थे पीछे परदे पर, वह फोटो मेरे पास अब भी है। मुंबई की बात करें तो मैं गोरेगांव ईस्ट की वनराय कॉलोनी में रहता था। बहुत सारे एक्टर्स एक साथ रहते थे। एक-एक रूम में पांच-पांच लोग रहते थे। उस वक्त की यादें हैं। 
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