फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Nassar Interview: पहली फिल्म मैंने राजेश खन्ना की 'आराधना' देखी, भाषा विवाद सिर्फ राजनीतिक पार्टियों की देन

Tue, 01 Aug 2023 12:16 PM IST
निधि पाल अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
विज्ञापन
1 of 12
आराधना, नासर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

साउथ सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नासर न सिर्फ साउथ फिल्म इंडस्ट्री में बल्कि हिंदी सिनेमा के दर्शकों के बीच भी काफी लोकप्रिय हैं। नासर करीब 550 तमिल और करीब 150 तेलुगु फिल्मों में काम कर चुके हैं। इसके अलावा कन्नड़, मलयालम और हिंदी फिल्मों में भी वह नजर आते रहते हैं। कड़े संघर्ष और मेहनत के बल पर नासर ने जो मुकाम बनाया है वह आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। सोनी लिव पर 9 अगस्त से प्रसारित होने जा रही वेब सीरीज 'द जेंगाबुरु कर्स' में वह एक बहुत ही खास किरदार निभाते नजर आने वाले हैं। ‘अमर उजाला’ की अभिनेता नासर से एक खास बातचीत।

विज्ञापन

2 of 12
नासर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सिनेमा के साथ साथ आपका नाम अक्सर राजनीति में भी सुनने को मिलता है, क्या उधर जाने का कोई विचार है?

राजनीति से मैं नहीं जुड़ा हूं, मेरी पत्नी कमीला नासर राजनीति से जुड़ी हुई है, मेरे नाम नासर से उनका जुड़ा है तो लोग मुझे समझते कि मैं भी राजनीति से जुड़ा हुआ हूं। अभिनय ही मेरा पहला प्यार है और वह हमेशा ही रहेगा। फिल्म निर्देशन से भी मुझे प्यार है, लेकिन फिल्म निर्माण को मैं जोखिम भरा मानता हूं। मेरी पहचान अभिनेता के तौर पर ही रही है, और आगे भी अभिनेता के तौर पर ही रहेगी।

इसे भी पढ़ें- OMG 2: बिना किसी कट के सेंसर बोर्ड से पास हुई 'ओएमजी 2', अक्षय कुमार की फिल्म को मिला 'ए' सर्टिफिकेट

विज्ञापन

3 of 12
नासर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अभिनय की शुरुआत कहां से हुई?

मेरे पिताजी की शुरू से ही इच्छा रही है कि मैं अभिनेता बनूं। वायु सेना भी गया था भर् होने लेकिन ट्रेनिंग पूरी होने से पहले ही वापस आ गया। मेरी डैडी का सुझाव था कि मुझे अभिनय के क्षेत्र में आना चाहिए। मैंने उनसे कभी पूछा नहीं कि ऐसा वह क्यों चाहते थे। हमारे ऐसे संस्कार हैं कि पिताजी से सवाल नहीं करते हैं। मेरे डैडी ज्वेलरी पॉलिश करने का काम करते थे। उनको सिनेमा देखने का भी शौक नहीं था। लेकिन वह चाहते थे कि मैं अभिनेता बनूं। साउथ इंडियन फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स के फिल्म इंस्टीट्यूट से एक्टिंग की बारीकियां सीखने के बाद मैंने मद्रास (चेन्नई) में तीन साल तक गुजारे के लिए ताज कोरोमंडल होटल में वेटर की नौकरी की। फिर तमिलनाडु इंस्टीट्यूट फॉर फिल्म एंड टेलीविजन टेक्नोलॉजी ज्वाइन किया। उसके बाद थियेटर से जुड़ा गया और काफी लंबे समय तक थियेटर करता रहा।

4 of 12
नासर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कैमरे के सामने आने से पहले आपने सहायक निर्देशक के तौर कैमरे के पीछे भी काम किया है...
उस समय हालात ऐसे थे कि जहां खाना मिल रहा है, वहां जाकर काम कर लेना है। कोई बोलता था कि एक शेड्यूल का काम है, पैसे नहीं मिलेंगे तो सिर्फ खाना मिलेगा, मैं चला जाता था। और, क्लैप मारता  था। इस तरह से मैंने पांच फिल्मों में सहायक निर्देशक के तौर पर काम किया। कहीं से पैसे मिलते थे और कहीं से नहीं मिलते थे। पैसे से ज्यादा जरूरी मेरे लिए यह था कि किसी न किसी तरह से खुद को सिनेमा से जोड़े रखना। 
विज्ञापन

5 of 12
नायकन फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मणि रत्नम की फिल्म नायकन को आपके करियर का टर्निंग प्वाइंट माना जा सकता है?
मणि सर की 'नायकन'  मेरी पांचवीं फिल्म थी। जब 'नायकन' की शूटिंग शुरू होने वाली थी तो उस समय तमिल के सारे एक्टर उसमें काम करना चाह रहे थे। मैंने भी कोशिश की लेकिन कुछ रिस्पॉन्स नहीं मिला जबकि फिल्म का एसोसिएट डायरेक्टर मेरा दोस्त था। फिल्म की शूटिंग शुरू हो गई और मैंने उम्मीद ही छोड़  दी थी। फिल्म के अंतिम शेड्यूल में एसोसिएट डायरेक्टर  के सुभाष ने बुलाया और रोल दिया। यहां से मणि सर और कमल हासन से अच्छी ट्यूनिंग हो गई और लगभग इनकी हर फिल्म में मै रहता ही हूं। 
विज्ञापन

6 of 12
अवतारम फिल्म - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, निर्देशन की शुरुआत कैसे हुई?
मैं जो भी फिल्में लिखता और निर्देशित करता हूं, उनमें एक्टिंग नहीं करना चाहता। मैं 'अवतारम' में सीनियर कार्तिक को हीरो लेना चाह रहा था, लेकिन बात बनी नहीं। इसलिए मैने उस फिल्म में अभिनय किया। मैं फुल टाइम डायरेक्टर नहीं हूं जब मौका मिलता है तो कर लेता हूं। 'अवतारम'  बाद मैंने 'देवथाई',  'मायन', 'पॉप कॉर्न', 'सुन सुन थाथा' जैसी चार तमिल फिल्में और निर्देशित की।
विज्ञापन

7 of 12
नासर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म 'देवथाई' का तो आपने निर्माण भी किया, निर्माता बनने के कैसे अनुभव रहे?

इस फिल्म का निर्माण करना मेरे जीवन की सबसे बड़ी भूल थी। 'देवथाई' का मतलब देवता होता है। इस फिल्म की कहानी मैंने खुद ही लिखी थी। बहुत अच्छी कहानी थी, मुझे लगा कि फिल्म खूब चलेगी। मैं यह नहीं कहूंगा कि इसमें मुझे असफलता मिली, बल्कि लोगों ने मुझे धोखा दिया। इसके बाद भी मैंने दो फिल्में 'पॉप कॉर्न', 'सुन सुन थाथा' और प्रोड्यूस की, लेकिन इसमें प्रोड्यूसर में मेरा नाम नहीं, बल्कि मेरी पत्नी कमीला नासर का नाम था।  

8 of 12
नासर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

'लगान' के लिए आमिर खान ने भी आपसे संपर्क किया था। वह कौन सी भूमिका थी और आप क्यों नहीं कर पाए?

हीरोइन के पिता के रोल में आमिर खान मुझे लेना चाह रहे थे। वह शूटिंग के लिए एक साथ 90 दिन चाह रहे थे। एक साथ उतना समय निकाल पाना मेरे लिए बहुत मुश्किल था। दूसरी बात क्रिकेट मैं नहीं खेल सकता, आमिर खान ने कहा कि वास्तविक क्रिकेट मैच नहीं है, वह सब मैनेज हो जाएगा। लेकिन मेरे लिए एक साथ 90 दिन का समय निकाल पाना बहुत मुश्किल था। फिर उस किरदार को श्रीवल्लभ व्यास ने बहुत अच्छे से निभाया।

9 of 12
नासर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

'निशब्द' में अमिताभ बच्चन के साथ काम करने के कैसे अनुभव रहे, इससे पहले भी कभी उनसे मिलना हुआ था?

बच्चन साहब शूटिंग के दौरान इतनी सहजता से पेश आए कि उनके साथ काम करना बहुत आसान हो गया। एक सीनियर एक्टर अपने से जूनियर एक्टर के साथ किस तरह से पेश आता है, वह चीज मैंने बच्चन साहब के साथ काम करके सीखी। उनके साथ मैंने चार दिन शूटिंग की थी और उनके साथ काम करके बहुत ही अच्छा लगा। इस फिल्म की शूटिंग से पहले बच्चन साहब से कभी मुलाकात नहीं हुई थी, लेकिन बच्चन साहब का व्यक्तित्व ही ऐसा है कि उनसे मिलने के बाद लगता है कि हम एक दूसरे को कितने समय से जानते हैं।

10 of 12
नासर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

साउथ बनाम हिंदी भाषा के विवाद को राजनीतिक पार्टियां नहीं खत्म कर पाई, लेकिन  उसे फिल्मों ने खत्म कर दिया। आप क्या कहना चाहेंगे?

भाषा विवाद पैदा करने वाले राजनीतिक पार्टियां ही हैं। हमारी इंडस्ट्री में भाषा को लेकर कभी कोई विवाद रहा ही नहीं। साल 1941 में एक फिल्म 'चंद्रलेखा' आई थी वह पूरे भारत में खूब चली। उस समय की सबसे बड़ी हिट फिल्म थी। आप 'शोले' को ही देख लीजिए, साउथ का एक- एक आदमी फिल्म के एक-एक फ्रेम के बारे में जनता है। फिल्म के सारे गाने, एक एक डायलॉग सबको याद हैं। 'एक दूजे के लिए' हर जगह चली। यह सब पहले से ही था, अभी थोड़ा 'बाहुबली' से कुछ ज्यादा हो गया।

11 of 12
नासर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

आपने पहली हिंदी फिल्म कौन सी देखी थी?

पहली फिल्म मैंने राजेश खन्ना की 'आराधना' देखी थी। रिलीज होने के एक साल बाद हमारे गांव चेंगलपट्टू में रिलीज हुई थी। तब भी वह फिल्म एक छोटे से गांव में एक महीने तक हाउसफुल चली। उस समय तमिल गीत उतने लोकप्रिय नहीं थे, सब लोग हिंदी गाने ही सुनते थे। शादी ब्याह कोई भी कार्यक्रम हो हर जगह हिंदी गाने ही सुनाई देते थे। 'आराधना' का गाना उन दिनों खूब लोकप्रिय हुआ था।

विज्ञापन

12 of 12
नासर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

और, वेब सीरीज 'द जेंगाबुरु कर्स' किस बारे में है?

यह सीरीज बदलते मौसम, प्रदूषण और प्रकृति के बारे में है। पिता और पुत्री के इर्द- गिर्द इस सीरीज की कहानी घूमती है। इस सीरीज के माध्यम से बहुत ही खूबसूरत संदेश देने की कोशिश की गई है। मैंने खुद पर्यावरण के लिए काफी काम कि/e हैं, जब इस सीरीज का प्रस्ताव मेरे पास आया तो मुझे बहुत अच्छा लगा।  इस सीरीज की शूटिंग के लिए पहली बार उड़ीसा गया था। वहां की संस्कृति, उनके म्यूजियम, खान पान मुझे बहुत अच्छा लगा।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें