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दूसरों की मदद पर पल रहा अमिताभ बच्चन की फिल्म का ये संगीतकार, तंगहाली में हो गई ऐसी हालत

Sun, 15 Sep 2019 02:36 PM IST
अपूर्वा राय मुंबई ब्यूरो, अमर उजाला
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Vanraj Bhatia - फोटो : social media
31 साल पहले सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीत चुके मशहूर संगीतकार वनराज भाटिया इन दिनों बहुत तंगहाली में दिन गुजार रहे हैं। लगातार स्वास्थ्य खराब रहने की वजह से उनका संपर्क बाहरी दुनिया से कट चुका है और इन दिनों उन्हें मदद की सख्त जरूरत है। भाटिया वैसे तो कमर्शियल सिनेमा से दूर ही रहे लेकिन उन्होंने अमिताभ बच्चन की फिल्म अजूबा (1991) में काफी चर्चित संगीत दिया था।
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Vanraj Bhatia - फोटो : social media
भारतीय संगीत की दुनिया का एक बड़ा नाम रहे हैं वनराज भाटिया। इन्हें निर्देशक श्याम बेनेगल की पहली पंसद माना जाता है। श्याम बेनेगल की कई फिल्मों जैसे अंकुर, भूमिका और टीवी सीरीज यात्रा और भारत की खोज का संगीत वनराज भाटिया ने ही दिया। आज वही वनराज भाटिया अकेलेपने का शिकार हो चुके हैं। भाटिया मुंबई के अपने घर में अकेले रहते हैं। छोटे-मोटे काम के लिए भी उन्हें मदद की जरुरत होती है। कभी पड़ोसी तो कभी किसी मददगार की बदौलत वह अपना जीवन यापन कर रहे हैं। जीवन के इस पड़ाव पर वह अपनों से दूर हैं। वह अकेलेपन के इस कदर शिकार हो चुके हैं कि वह उम्मीद ही खो चुके हैं कि कोई उनकी सुध लेने भी आ सकता है। कोई मेहमान उनसे मिलने आ भी गया तो वह अचंभित हो जाते हैं।
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Vanraj Bhatia - फोटो : social media
वनराज भाटिया को लगता है कि कि अब किसी को भी उनकी जरूरत नहीं है। वह अंदरुनी रुप से अपने स्वास्थ्य और शारीरिक अक्षमता के कारण टूट चुके हैं। घर में किसी अजनबी के आने के बारे में तो वह सोच भी नहीं सकते हैं। अपने घुटनों के दर्द से बेहद पीड़ित इस कालजयी संगीतकार को अब एक कमरे से दूसरे कमरे में जाने के लिए भी मदद की जरुरत होती है। सुनने में भी दिक्कत होती है साथ ही अब उनकी याददाश्त भी कमजोर हो रही है।

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Vanraj Bhatia - फोटो : social media
पड़ोसी बताते हैं कि रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए घर के बेशकीमती सामान को बेचने तक की नौबत आ चुकी है। भाटिया को उनके कुछ दोस्त, चाहने वाले और कुछ संस्थाएं वित्तीय रुप से मदद कर रही हैं ताकि वह आराम से अपना गुजर बसर कर सके, चिकित्सीय मदद मिल सके और घर का खर्चा और किराया निकल सके। लेकिन यह पैसा पूरी तरह से पर्याप्त नहीं है। भाटिया का खुद का कुछ निवेश था जो साल 2000 के आस-पास शेयर मार्केट के उतार-चढ़ाव में खत्म हो गया।  
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Vanraj Bhatia - फोटो : social media
वनराज भाटिया को जानने वाले बताते हैं कि मुंबई के एलिफिंस्टन कॉलेज से ग्रेजुएशन के बाद वनराज भाटिया ने लदंन और पेरिस से पश्चिमी शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण लिया। वापस आने के बाद वह विज्ञापन जगत से जुड़ गए। यहां उन्होंने करीब छह हजार विज्ञापन जिंगल्स कंपोज कए। भाटिया ने शादी नहीं की है। उनकी बहन अपने परिवार के साथ कनाडा में रहती हैं। शहर में उनके कुछ रिश्तेदार हैं जो उनकी मदद करते हैं। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के अलावा वनराज संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और पद्म श्री पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुके हैं। 
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