Vanraj Bhatia
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पड़ोसी बताते हैं कि रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए घर के बेशकीमती सामान को बेचने तक की नौबत आ चुकी है। भाटिया को उनके कुछ दोस्त, चाहने वाले और कुछ संस्थाएं वित्तीय रुप से मदद कर रही हैं ताकि वह आराम से अपना गुजर बसर कर सके, चिकित्सीय मदद मिल सके और घर का खर्चा और किराया निकल सके। लेकिन यह पैसा पूरी तरह से पर्याप्त नहीं है। भाटिया का खुद का कुछ निवेश था जो साल 2000 के आस-पास शेयर मार्केट के उतार-चढ़ाव में खत्म हो गया।