सिनेमैटोग्राफ से फिल्म निर्देशक बनने वालों की 'हिंदी सिनेमा' में एक लंबी फेहरिस्त रही है। लक्ष्मण उतेकर इस श्रृंखला की अगली कड़ी बना रहे हैं बतौर निर्देशक उनकी पहली 'हिंदी फिल्म' और दूसरी 'लुका छुपी' है। उत्तर भारतीय परिवारों की दबी ढकी बातों पर कहानियां बनाकर फिल्में बनाने के 'विकी डोनर' और 'बधाई हो' के चलन को ये फिल्म आगे बढ़ाती है। मनोरंजन के कैप्सूल के भीतर लिव इन की दवाई है और सवाल ये है कि 'अगर शाहजहां मुमताज के साथ लिव इन में रहता तो क्या ताज महल बन पाता!'
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luka chuppi
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रोहन शंकर ने लिव इन के सवाल पर एक अच्छी कहानी लिखने की कोशिश की है और मथुरा जैसे संस्कारी शहर के एक उतने ही संस्कारी परिवार में ये कहानी बिठाकर बतौर लेखक रोहन ने अपने प्रगतिशील होने का नमूना भी पेश किया है। रोहन शंकर और लक्ष्मण उतेकर की जोड़ी को किस्से गढ़ना आता है, हिंदी सिनेमा में ये उनका पहला टेस्ट है और इसे उन्होंने अच्छे नंबरों से पास भी किया है।
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फिल्म 'लुका छुपी' की कहानी शुरु होती है मथुरा से। जहां संस्कृति सुरक्षा मंच राजनीतिक दल चलाने वाले विष्णु त्रिवेदी की दबंगई के आगे प्रेमी जोड़ों का छुप-छुप कर मिलना दुश्वार हो जाता है। विष्णु की बेटी रश्मि दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी कर मथुरा आई है। टीवी रिपोर्टर गुड्डू शुक्ला के चैनल में रश्मि इंटर्न है। मथुरा की गलियों में लिव इन रिलेशनशिप विषय पर न्यूज रिपोर्टिंग करते हुए गुड्डू और रश्मि के बीच प्यार हो जाता है। और, इसी के साथ शुरू होती है लुका छिपी।
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फिल्म के हर कलाकार ने इस फिल्म को 12 मसाले 56 जायके वाली फिल्म बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। कार्तिक आर्यन का मासूम सा चेहरा उनकी बदमाशियों के पंच का असली औजार है। कृति सैनन ने भी मेहनत काफी की है, लेकिन उनकी अदाकारी एक फरमे में फंसी दिखने लगी है। फिल्म की जान हैं इसके साथी कलाकार। बाबूलाल बने पंकज त्रिपाठी हर पांचवें छठे सीन में जबर्दस्त तड़का लगाते हैं। अपराशक्ति खुराना ने हिंदी सिनेमा में अपनी जो अलग जगह बनाई है, 'लुका छुपी' उसे और मजबूत करती है।
मथुरा के खूबसूरत मंदिरों से लेकर ग्वालियर की गलियों तक सिनेमैटोग्राफी खूबसूरत तरीके से की गई है। फिल्म का संगीत पक्ष इस मामले में कमजोर है कि इसके ज्यादातर गाने रीमिक्स हैं और हिंदी सिनेमा की मूल संगीत की परपंरा की विपरीत धारा में तैरने की कोशिश करते हैं। महिला किरदारों को विषय वस्तु की तरह पेश करने की इस परंपरा का तोड़ने की कोशिश कम से कम दिनेश विजन जैसे निर्माताओं से रहती है पर दिनेश को कृति सैनन के करिश्मे से बाहर निकलने की कोशिश इसके लिए करनी होगी। अमर उजाला डॉट कॉम के मूवी रिव्यू में फिल्म लुका छुपी को मिलते हैं तीन स्टार।