यह एक किस्म की प्रयोगात्मक फिल्म भी है, जिसमें वास्तविक ईवेंट के साथ कहानी पिरोई गई है। थोड़ा सच, थोड़ा झूठ। सिनेमा और है क्या?
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फिल्मी दुनिया में जो दिखता है, उससे कहीं ज्यादा छिपा रहता है। 'वेलकम टू न्यूयॉर्क' कुछ ऐसी ही छिपी बातों को कॉमिक अंदाज में सामने लाती है। यह अलग बात है कि कहीं-कहीं सब बनावटी और सप्रयास रचा गया लगता है। बरसों से आईफा अवार्ड्स आयोजित कर रही विजक्राफ्ट कंपनी के मालिक गैरी (बोमन ईरानी) ने अपनी सहयोगी सोफी (लारा दत्ता) से वादा किया है कि उसे कंपनी में पार्टनरशिप देंगे।
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जब वह वादे से मुकर जाता है, तो सोफी बदला लेती है। वह आईफा में शामिल होने के लिए भारत में एक टैलेंट हंट आयोजित करके दो सबसे खराब प्रतियोगियों को न्यूयॉर्क पहुंचाती है। ये हैं तेजी (दिलजीत दोसांझ) और जीनल पटेल (सोनाक्षी सिन्हा)। बॉलीवुड का फैन और ओवर ऐक्टिंग करने वाला तेजी गुंडा टाइप बंदा है और जीनल को बनना है इंटरनेशनल फैशन डिजाइनर।
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दोनों को लगता है कि आईफा में बॉलीवुड सेलिब्रिटिज से मिलना जिंदगी बदल देगा। सपनों को सच कर देगा। कहानी में ट्विस्ट यह कि मंच पर आईफा की मेजबानी करने जा रहे करण (करण जौहर) का हमशक्ल है, अर्जुन (करण जौहर)। करण के लोकप्रिय डायरेक्टर बनने से अंडरवर्ल्ड में अर्जुन का बाजार बैठ गया। लोग अर्जुन को करण समझते हैं और अब उससे कोई नहीं डरता। शो से पहले करण का अपहरण हो जाता है और स्थितियां काबू से बाहर होने लगती हैं।
क्या होगा आईफा का, क्या होगा तेजी और जीनल के सपनों का? यहां कॉमेडी साफ-सुथरी है और आईफा में ढेर सारे सितारों की झलकियां दिखती हैं। लेखक-निर्देशक ने मीठी छुरी से बॉलीवुड की सर्जरी की। रितेश देशमुख, राणा डग्गुबाती और आदित्य रॉय कपूर आकर्षित करते हैं। बोमन और लारा की भूमिकाएं रोचक हैं। दिलजीत दोसांझ और सोनाक्षी सिन्हा के किरदारों को स्क्रिप्ट में बेहतर ढंग से न रचने की कमी खलती है।